अब इलाज के लिए नहीं बिकेगी जमीन! बंगाल के फैसले से किशनगंज में जगी उम्मीद की नई रोशनी
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बिहार के सीमांचल क्षेत्र के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में आगामी 1 जुलाई 2026 से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) पूरी तरह लागू होने जा रही है। इस निर्णय का सबसे सीधा और बड़ा आर्थिक लाभ किशनगंज के उन निवासियों को मिलेगा, जो बेहतर इलाज के लिए सिलीगुड़ी और इस्लामपुर के अस्पतालों पर निर्भर हैं।

आर्थिक तंगी और कर्ज से मिलेगी मुक्ति किशनगंज और ठाकुरगंज के सुदूर देहाती इलाकों में गंभीर बीमारियों का इलाज अब तक किसी आर्थिक आपदा से कम नहीं था। कैंसर, हार्ट अटैक या किडनी की समस्याओं के सामने आते ही परिवारों को अपनी पुश्तैनी जमीन बेचने या सूदखोरों से भारी ब्याज पर कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ता था। बंगाल सरकार के इस कदम से अब मरीजों को इलाज के लिए अपना घर-बार गिरवी रखने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी।

5 लाख तक का कैशलेस इलाज संभव आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभार्थी परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक के मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। चूँकि किशनगंज के 80% से अधिक मरीज आपातकालीन स्थिति में सिलीगुड़ी, रायगंज या कोलकाता के सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों का रुख करते हैं, इसलिए अब 1 जुलाई से इन सूचीबद्ध अस्पतालों में बिहार के आयुष्मान कार्ड भी मान्य होंगे। मरीजों को इलाज के लिए जेब से एक रुपया भी खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी।

सीमांचल में खुशी की लहर बंगाल के इस फैसले के बाद किशनगंज के ठाकुरगंज, बहादुरगंज, टेढ़ागाछ, दिघलबैंक और पोठिया प्रखंडों में उत्साह का माहौल है। चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों और छोटे किसानों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। स्थानीय लोगों का मानना है कि भौगोलिक सीमाएं भले ही दो राज्य अलग करती हों, लेकिन चिकित्सा के मामले में किशनगंज पूरी तरह सिलीगुड़ी के मेडिकल हब पर आश्रित है।

अस्पताल के भारी बिल का डर अब खत्म इलाज की इस नई व्यवस्था पर प्रतिक्रिया देते हुए ठाकुरगंज के एक बुजुर्ग ने कहा, बीमारी का शारीरिक दर्द तो इंसान सह लेता है, लेकिन अस्पताल का बिल भरने के लिए जमीन बिक जाने का डर हमें जीते जी मार देता था। इस फैसले से अब हमारी आने वाली पीढ़ी सुरक्षित महसूस करेगी।

प्रशासन से विशेष कैंप की मांग इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किशनगंज जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से एक विशेष अपील की है। मांग की गई है कि 1 जुलाई से पहले जिले की सभी पंचायतों में कैंप लगाकर उन हजारों परिवारों के गोल्डन कार्ड बनवाए जाएं, जो अब तक तकनीकी दिक्कतों के कारण योजना से वंचित हैं। प्रशासन की सक्रियता ही यह सुनिश्चित करेगी कि सीमांचल का आखिरी व्यक्ति भी इस सुरक्षा कवच का लाभ उठा सके।

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