थरूर की पीएम मोदी से नजदीकी ? नाविकों के मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर छिड़ा सियासी घमासान
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर एक बार फिर अपनी ही पार्टी के निशाने पर हैं। पीएम मोदी की तारीफ करने और उनके बयानों की व्याख्या को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब कांग्रेस के भीतर वैचारिक मतभेदों को सार्वजनिक कर रहा है।

क्या है पूरा मामला? विवाद की शुरुआत शशि थरूर के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बैठक में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। थरूर ने कहा कि पीएम ने स्पष्ट किया था कि युद्ध के दौरान कमर्शियल जहाजों पर काम करने वाले सिविलियन नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

पवन खेड़ा का तीखा तंज थरूर के इस दावे पर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर कड़ा प्रहार किया। खेड़ा ने लिखा, मेरे सीनियर साथी डॉ. शशि थरूर का पीएम मोदी के लिए प्यार भौतिक दुनिया की सीमाओं से आगे निकल गया है। वे अब वो बातें भी सुन लेते हैं जो पीएम मोदी ने कभी कहीं ही नहीं।

खेड़ा ने तर्क दिया कि विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक रीडआउट में ऐसी किसी चर्चा का उल्लेख नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि थरूर को वो दमदार कूटनीति सुनाई दे गई, जो आधिकारिक रिकॉर्ड में कहीं मौजूद ही नहीं थी।

थरूर का पलटवार: राजनीति से ऊपर है जान बचाना अपने बचाव में शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद केवल भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे को उठाना था। उन्होंने कहा, तीन भारतीयों की जान गई है। अगर कुछ लोगों को इस पर राजनीति करने में ज्यादा दिलचस्पी है, तो यह उनके बारे में ज्यादा बताती है, मेरे बारे में नहीं।

थरूर ने अपने दावे के समर्थन में मीडिया रिपोर्ट्स और गूगल जेमिनी द्वारा तैयार की गई एक समरी का हवाला दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे तथ्यहीन बातें नहीं करते और प्रिंट मीडिया में आई रिपोर्ट्स के आधार पर ही उन्होंने यह बात कही थी।

बीजेपी को मिला फ्री-हिट इस आंतरिक कलह का लाभ उठाते हुए बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि थरूर का बयान राहुल गांधी के स्टैंड से बिल्कुल अलग है। पूनावाला ने कटाक्ष किया कि पार्टी नेतृत्व जिस राह पर चल रहा है, वरिष्ठ नेता उसी का खंडन कर रहे हैं।

यह विवाद एक बार फिर यह दर्शाता है कि पीएम मोदी की कार्यशैली और विदेश नीति के प्रति कांग्रेस के भीतर एक स्पष्ट राय का अभाव बना हुआ है। जहां एक धड़ा पूरी तरह से मोदी सरकार के विरोध की वकालत करता है, वहीं थरूर जैसे नेता अक्सर कूटनीतिक मुद्दों पर अलग सुर अपनाते नजर आते हैं।

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