उद्धव ठाकरे का भावुक ऐलान: अगर मुझ पर लगे आरोप सच हैं, तो अभी छोड़ दूंगा पार्टी प्रमुख का पद
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महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर भारी उथल-पुथल देखने को मिली। पार्टी के दो धड़ों के बीच जारी वर्चस्व की जंग उस समय चरम पर पहुंच गई, जब उद्धव ठाकरे ने पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने की पेशकश कर दी।

विद्रोहियों को उद्धव का सीधा जवाब शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे काफी भावुक नजर आए। उन्होंने स्पष्ट कहा, अगर पार्टी कार्यकर्ताओं को लगता है कि मेरे सांसदों द्वारा लगाए गए आरोप सच हैं कि मैं उपलब्ध नहीं रहता, तो मैं अभी पद छोड़ने के लिए तैयार हूं। मुझे नेता बनने की कोई लालसा नहीं है।

सोने की शिवसेना चोरों के हाथ में नहीं ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा कि वे भागने वालों में से नहीं हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, मेरे लिए एक चीज साफ है कि सोने जैसी शिवसेना को चोरों के हाथों में नहीं सौंपा जाना चाहिए। आरोप लगाने वाले सांसद कह रहे हैं कि मैं उन्हें समय नहीं देता, आप ही तय कीजिए कि क्या आप इन आरोपों पर भरोसा करते हैं?

ऑपरेशन टाइगर और गंदी राजनीति शिवसेना (UBT) ने एकनाथ शिंदे गुट की ओर से शुरू किए गए कथित ऑपरेशन टाइगर को गंदी राजनीति करार दिया है। ठाकरे ने उन दावों का भी खंडन किया कि उनकी पार्टी कांग्रेस में विलय करने वाली है। उन्होंने कहा कि 30 साल तक बीजेपी के साथ रहने के बावजूद हमने अपनी पहचान नहीं खोई, तो अब ऐसा क्यों करेंगे?

क्या बोले एकनाथ शिंदे? दूसरी ओर, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नेस्को ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि अभी तो यह सिर्फ ट्रेलर है, पूरी फिल्म बाकी है। उन्होंने साफ लहजे में कहा, बालासाहेब ठाकरे के असली वारिस मेरे शिवसैनिक हैं। उत्तराधिकार खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि विचारधारा से तय होता है।

लोकतंत्र के लिए खतरा उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में वन नेशन, वन इलेक्शन के बहाने वन नेशन, नो इलेक्शन की ओर बढ़ा जा रहा है। उन्होंने मणिपुर और पीओके की स्थिति पर सवाल उठाते हुए केंद्र की नीतियों को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया।

शिवसेना का भविष्य 1966 में बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित यह पार्टी आज दो धड़ों में बंटी हुई है। एक तरफ चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त एकनाथ शिंदे की शिवसेना है, तो दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे का धड़ा है जिसे मशाल चुनाव चिह्न मिला है। सांसदों की संभावित बगावत और स्थापना दिवस पर हुई इस भावनात्मक बयानबाजी ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सस्पेंस पैदा कर दिया है।

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