भरत तिवारी एनकाउंटर: अब पिता और भाई पर FIR, 14 नामजद समेत 50 अज्ञात पर भी केस दर्ज
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बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में विवाद गहराता जा रहा है। पुलिस ने न केवल एनकाउंटर के बाद हुए हंगामे पर सख्त रुख अपनाया है, बल्कि अब मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी कानूनी घेरे में ले लिया है। इस मामले में अब तक कुल तीन FIR दर्ज हो चुकी हैं।

पिता और भाई पर क्यों हुई FIR?

17 जून को सस्पेंड किए गए शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार द्वारा दर्ज कराई गई FIR में भरत के पिता और भाई को आरोपी बनाया गया है। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने भरत को न केवल संरक्षण दिया, बल्कि उसके पास मौजूद अवैध हथियारों को छिपाने में भी मदद की। यह कार्रवाई जांच के दौरान सामने आए कथित तथ्यों के आधार पर की गई है।

सड़क जाम पर भारी कार्रवाई

एनकाउंटर के बाद आरा-बक्सर फोरलेन पर शव रखकर किए गए विरोध-प्रदर्शन और चक्का जाम को लेकर भी पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस ने इस मामले में 14 नामजद और 50 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। उन पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने का आरोप है। पुलिस वीडियो फुटेज के जरिए अज्ञात लोगों की पहचान कर रही है।

पुलिस बनाम जनता: वायरल वीडियो ने बढ़ाई मुश्किलें

पुलिस का दावा है कि 17 जून की सुबह बेलौटी गांव में सूचना मिलने पर वे हथियार बरामद करने पहुंचे थे, जहां भरत ने फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने पुलिस के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में कथित तौर पर भरत को पुलिस की ओर हथियार फेंकते हुए देखा गया, जिसके बावजूद उसे गोलियां मारी गईं। यही कारण है कि परिजन इसे फर्जी एनकाउंटर बता रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में उबाल

भरत तिवारी की मौत ने राजनीतिक रूप ले लिया है। भाकपा-माले और जन सुराज सहित कई संगठनों ने इस घटना की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है। नेताओं का तर्क है कि घटनाक्रम में कई विसंगतियां हैं, जिन्हें छिपाने के लिए पुलिस प्रशासन अब परिवार को ही निशाना बना रहा है।

आगे क्या?

एक ओर जहां पुलिस अपनी कार्रवाई को कानूनी दायरे में बता रही है, वहीं दूसरी ओर मृतक के परिवार की ओर से की गई शिकायत पर पुलिस की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। अब पूरे जिले की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य और जांच की निष्पक्षता पर टिकी हैं। फिलहाल, पिता और भाई पर FIR होने से स्थानीय स्तर पर तनाव और बढ़ने की संभावना है।

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