अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान और बेशकीमती आभूषणों की चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर प्रकरण ने मंदिर की दान व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया है।
आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं : मुख्यमंत्री योगी का कड़ा संदेश राम मंदिर का दौरा करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को सरकार बख्शने वाली नहीं है। SIT मामले की गहन जांच कर रही है और चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे सजा भुगतनी होगी। मुख्यमंत्री ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है और 15 दिनों के भीतर सच्चाई सामने लाने का आश्वासन दिया है।
जांच के केंद्र में ट्रस्टी और कर्मचारी SIT की जांच का दायरा काफी विस्तृत हो गया है। इसमें ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के साथ-साथ गोपाल राव, केडी तिवारी, सुभाष श्रीवास्तव और टिन्नू यादव सहित कई अन्य लोगों से पूछताछ की जा रही है। अनिल मिश्रा पर विशेष रूप से सवाल उठ रहे हैं क्योंकि दान के वित्तीय प्रबंधन और बैंक जमा की जिम्मेदारी सीधे उन्हीं के अधीन थी।
CCTV बंद करने और नियमों की अनदेखी का खुलासा जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मंदिर के काउंटिंग रूम में सीसीटीवी अक्सर बंद कर दिए जाते थे, ताकि हेराफेरी को पकड़ा न जा सके। दान की गिनती करने वाले कर्मियों के लिए जेब रहित कपड़े पहनने और तलाशी के कड़े नियम थे, लेकिन इन आदेशों की धज्जियां उड़ाई गईं। फुटेज में कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां छिपाते हुए भी देखे गए हैं।
आभूषणों का रहस्य और रिकॉर्ड में गड़बड़ी सिर्फ नकदी ही नहीं, बल्कि सोने-चांदी के आभूषणों की चोरी भी संदेह के घेरे में है। जौनपुर के एक भक्त द्वारा भेंट किए गए रत्नजड़ित हार और चांदी की चरण पादुकाओं का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है। इस संबंध में गर्भगृह प्रभारी केडी तिवारी से भी कई दौर की पूछताछ हो चुकी है, लेकिन अभी तक बहुमूल्य उपहारों का कोई अता-पता नहीं है।
चंपत राय की अनुपस्थिति के राजनीतिक मायने मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की गैर-मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन ने ट्रस्ट को चंपत राय के स्थान पर किसी अन्य प्रतिनिधि को भेजने का संदेश दिया था, जिसे राजनीतिक गलियारों में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पूर्व इंजीनियर का गंभीर आरोप मंदिर निर्माण से जुड़े रहे पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने दावा किया है कि वित्तीय अनियमितताएं नई नहीं हैं। उन्होंने निर्माण के दौरान भी कमीशनखोरी और पैसों की हेराफेरी के आरोप लगाए हैं। वर्मा का दावा है कि पहले भी इसकी शिकायत की गई थी, लेकिन ट्रस्ट स्तर पर इसे नजरअंदाज कर दिया गया।
अब सबकी निगाहें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर SIT को 7 दिनों में प्राथमिक और 15 दिनों में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है। पुराने CCTV फुटेज डिलीट होने से जांच एजेंसी के सामने चुनौती जरूर है, लेकिन पूछताछ में मिले सुराग और संपत्तियों की जांच से दोषियों का बचना नामुमकिन लग रहा है। यह मामला अब केवल वित्तीय चोरी का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था की विश्वसनीयता का बन चुका है।
*#AajKiBaat | राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर CM योगी का बयान- अपराधी कितना भी बड़ा हो, बचेगा नहीं
— India TV (@indiatvnews) June 19, 2026
SIT की जांच में दूध का दूध पानी का पानी होगा- सीएम योगी #RamMandir #Ayodhya #Theft #RamMandirTrust #SIT #ChampatRai #CMYogi pic.twitter.com/xXUvpyopks
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