भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एक पूर्व बिचौलिए ने दावा किया है कि सीमा पार लोगों की तस्करी करने वाला संगठित नेटवर्क सालाना 800 से 900 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार कर रहा था। इस पूरे खेल में एजेंट, स्थानीय संपर्क और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह शामिल थे।
1000 घाटों से होता था अवैध प्रवेश रिपोर्ट के अनुसार, भारत-बांग्लादेश सीमा पर करीब 1000 ऐसे घाट चिन्हित किए गए थे, जहाँ से घुसपैठियों को सुरक्षित तरीके से भारतीय सीमा में प्रवेश कराया जाता था। इसके लिए सीमा के दोनों ओर लाइनमैन तैनात थे, जो सीमा सुरक्षा बल (BSF) की गश्त और निगरानी पर बारीक नजर रखते थे। जब रास्ता साफ होता था, तभी लोगों को खेतों और झाड़ियों के रास्ते भारत में लाया जाता था।
डिजिटल भुगतान और सिम का जाल यह गिरोह पूरी तरह से आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करता था। भारतीय और बांग्लादेशी सिम कार्डों के जरिए दोनों देशों के एजेंट आपस में लगातार संपर्क में रहते थे। घुसपैठ के बाद, स्थानीय नेटवर्क इन लोगों को बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों तक पहुँचाता था, जहाँ से उन्हें देश के बड़े शहरों में काम पर लगा दिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में डिजिटल भुगतान का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।
फर्जी दस्तावेजों की फैक्ट्रियां घुसपैठियों को भारत में वैध नागरिक बनाने के लिए एक समानांतर तंत्र काम कर रहा था। बिचौलिए का दावा है कि आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज स्थानीय स्तर पर मिलीभगत से तैयार किए जाते थे। इसमें कुछ पूर्व स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से जुड़े लोगों पर भी गंभीर आरोप लगे हैं, जिन्होंने अवैध दस्तावेजों को बनवाने में मदद की।
क्या अब बंद हुआ यह धंधा? दावे के मुताबिक, नवंबर 2025 में मतदाता सूची के सत्यापन (SIR अभियान) और हाल ही में राज्य में भाजपा सरकार के गठन के बाद से स्थिति बदली है। कठोर निगरानी और सत्यापन प्रक्रियाओं के कारण इस संगठित नेटवर्क की कमर टूट गई है और अब यह धंधा लगभग बंद होने की कगार पर है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता अब भी इस समस्या को पूरी तरह जड़ से खत्म करने के लिए बेहद जरूरी है।
Anandabazar Investigation Exposes a Massive Bangladesh Infiltration Network
— Facts (@BefittingFacts) June 19, 2026
A report claims illegal infiltration across the India-Bangladesh border has evolved into a ₹900 crore annual racket.
• “Ghats” identified as key infiltration points on both sides of the border.
•… pic.twitter.com/h9qVAwrxff
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