मौलाना सज्जाद नोमानी का हिंदू अल्पसंख्यक वाला बयान: गरमाई सियासत, भाजपा विधायक ने दी कड़ी चुनौती
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भोपाल: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य मौलाना सज्जाद नोमानी का एक विवादास्पद बयान इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। नोमानी ने दावा किया है कि भारत में हिंदू बहुसंख्यक नहीं, बल्कि अल्पसंख्यक हैं। इस बयान पर सियासी गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

क्या कहा मौलाना नोमानी ने? मौलाना सज्जाद नोमानी ने एक कॉन्क्लेव के दौरान अपने 30 वर्षों के अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि यदि समुदायों और जातीय समूहों को अलग-अलग देखा जाए, तो हिंदुओं को बहुसंख्यक नहीं माना जा सकता। उन्होंने दावा किया कि सिख, ईसाई, बौद्ध, अनुसूचित जाति, आदिवासी, लिंगायत और तमिलनाडु के लोग हिंदू आबादी का हिस्सा नहीं हैं। नोमानी के अनुसार, इन समुदायों की अपनी अलग पहचान है।

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा का पलटवार मौलाना के इस दावे पर भोपाल से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इसे हिंदुओं को बरगलाने की साजिश करार दिया। शर्मा ने कहा, इतिहास गवाह है कि बाबर, अकबर और औरंगजेब जैसे आक्रमणकारियों ने भारत को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन वीर योद्धाओं ने धर्म की रक्षा की।

हिंदुस्तान पर राज करने की अनुमति नहीं विधायक रामेश्वर शर्मा ने खुली चुनौती देते हुए कहा, न तो हिंदू इस देश में अल्पसंख्यक होगा और न ही किसी को इस देश पर राज करने दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग आज भी गजवा-ए-हिंद जैसी मानसिकता रखते हैं। उन्होंने हिंदू समाज से आह्वान किया कि वे जाति और धर्म से ऊपर उठकर देश की एकता के लिए एकजुट हों।

कांग्रेस ने भी बयान को बताया मूर्खतापूर्ण इस विवाद में कांग्रेस ने भी मौलाना की निंदा की है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने मौलाना नोमानी के बयान को गैरजिम्मेदाराना और मूर्खतापूर्ण करार दिया है। राजपूत ने कहा कि कुछ लोग केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह के बयान देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में हो रही जनगणना के आधिकारिक आंकड़े आने के बाद ही किसी भी निष्कर्ष पर चर्चा की जानी चाहिए।

सियासी बयानबाजी का दौर मौलाना नोमानी का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब देश में जनगणना और धार्मिक पहचान को लेकर बहस तेज है। जहां एक ओर नोमानी इसे अपना शोध बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक दल इसे समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की राजनीति तक बहस का मुद्दा बन गया है।

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