कतर से लौटा दिशा : 110 दिनों के सन्नाटे के बाद भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा बूस्ट
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दाहेज: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर है। कतर से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) लेकर आ रहा विशाल टैंकर दिशा गुरुवार को गुजरात के भरूच स्थित दाहेज टर्मिनल पर सफलतापूर्वक पहुंच गया है। 110 दिनों के लंबे इंतजार के बाद कतर से हुई यह आपूर्ति देश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ा सहारा मानी जा रही है।

खतरनाक समुद्री रास्ते को किया पार यह टैंकर 62,370 मीट्रिक टन गैस लेकर आया है। इसे दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरना पड़ा। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण यह रास्ता वाणिज्यिक जहाजों के लिए बेहद असुरक्षित हो गया था। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच ताजा शांति समझौते के बाद हालात सुधरे, जिसका लाभ उठाते हुए दिशा ने सुरक्षित सफर पूरा किया।

क्यों अहम है यह खेप? भारत की सबसे बड़ी एलएनजी आयातक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी के लिए यह आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है। 1 मार्च 2026 के बाद से कोई भी एलएनजी जहाज कतर से दाहेज नहीं पहुंच पाया था। मार्च, अप्रैल और मई के महीनों में क्षेत्रीय तनाव ने आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह ठप कर दिया था, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बढ़ गया था।

औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगी रफ्तार कतर एनर्जी और पेट्रोनेट एलएनजी के बीच हुए दीर्घकालिक अनुबंध के तहत आया यह जहाज माल्टा के झंडे वाला है, जिसका संचालन शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व में हो रहा है। दाहेज टर्मिनल की वार्षिक क्षमता 22.5 मिलियन टन है। इस खेप के पहुंचने से बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों के लिए ईंधन की कमी का संकट दूर होने की उम्मीद है।

आगे क्या होगा? विशेषज्ञों का कहना है कि यह आपूर्ति भारत की कूटनीतिक सक्रियता का बड़ा उदाहरण है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि कतर से एलएनजी की आपूर्ति फिर से नियमित हो जाएगी। इससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि आने वाले समय में आम जनता को भी महंगाई से राहत मिल सकती है, क्योंकि ईंधन की कीमतों में स्थिरता आने से उत्पादन लागत में कमी आएगी।

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