उद्धव ठाकरे की शिवसेना में बड़ी फूट: कांग्रेस ने इसे बताया संविधान पर हमला , जानें पूरी खबर
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ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बाद अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को बड़ा झटका लगा है। उद्धव गुट के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। ये सभी सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय की तैयारी में हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने विपक्ष में हलचल मचा दी है।

कांग्रेस का बड़ा आरोप: यह नेशनल डिफेक्टर अलायंस है कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस बगावत को लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला करार दिया है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल विपक्ष का मनोबल तोड़ने के लिए तोड़फोड़ और धमकी की राजनीति कर रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए इसे नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के बजाय नेशनल डिफेक्टर अलायंस बताया है।

क्यों बौखलाई है सरकार? जयराम रमेश ने खोला राज जयराम रमेश ने दावा किया कि यह सब 17 अप्रैल 2026 की उस घटना का परिणाम है, जब लोकसभा में गृह मंत्री को संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी 2/3 बहुमत नहीं मिला था। उस दिन उन्हें सिर्फ 298 वोट मिले थे। रमेश के अनुसार, इस अपमान से नाराज प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अब किसी भी कीमत पर अपनी संख्या बल बढ़ाने में जुटे हैं ताकि संसद का विशेष सत्र बुलाकर मनमाना बदलाव कर सकें।

नहीं मिलेगा 362 का जादुई आंकड़ा कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि विपक्ष एकजुट है। उन्होंने कहा, वे चाहे कितने भी हथकंडे अपना लें और सांसदों को लुभाने के लिए कोई भी स्कीम ले आएं, उन्हें 362 (2/3 बहुमत) का आंकड़ा नहीं मिलेगा। उन्होंने इसे सरकार द्वारा खेला जा रहा एक साइकोलॉजिकल गेम बताया।

कौन हैं बागी सांसद? शिवसेना (UBT) के जो 6 सांसद अलग हुए हैं, उनमें भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी), नागेश पाटिल (हिंगोली), संजय दीना पाटिल (मुंबई नॉर्थ-ईस्ट), संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी), ओमप्रकाश राजे (उस्मानाबाद) और संजय देशमुख (यवतमाल) शामिल हैं। इन नेताओं ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर विलय का पत्र सौंप दिया है।

टीएमसी में भी भारी टूट शिवसेना से पहले तृणमूल कांग्रेस को भी बड़ा झटका लगा था। टीएमसी के 28 में से 20 सांसद अलग होकर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय कर चुके हैं। बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने घोषणा की है कि उनका गुट अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए के साथ काम करेगा।

इस घटनाक्रम के बाद राजनीति का पारा चढ़ गया है। असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि शिकारी नया है, लेकिन जाल वही पुराना है।

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