होर्मुज जलडमरूमध्य खुला, तनाव खत्म: अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक 14-सूत्रीय शांति समझौता
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दुनिया के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव अब खत्म होता दिख रहा है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने एक ऐतिहासिक 14-सूत्रीय समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सैन्य संघर्ष को रोकना और वैश्विक व्यापार के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है।

इस्लामाबाद समझौते का ऐलान यह समझौता इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के नाम से जाना जा रहा है। इसे पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों के तहत संपन्न कराया गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस ऐतिहासिक डील की पुष्टि की और इसे क्षेत्रीय शांति के लिए एक मील का पत्थर करार दिया। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने डिजिटल माध्यम से इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

होर्मुज जलमार्ग होगा बहाल समझौते के मुताबिक, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी देगा। अगले 60 दिनों तक यहां से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके बदले में अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे समुद्री व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होंगी।

परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर राहत इस करार के तहत अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते पर बातचीत पूरी की जाएगी। अमेरिका ने ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और ईरानी तेल निर्यात के लिए वित्तीय छूट देने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही, ईरान की अटकी हुई संपत्तियों को भी जारी किया जाएगा। बदले में, ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने का संकल्प दोहराया है और यूरेनियम भंडार की निगरानी के लिए IAEA की भूमिका को स्वीकार किया है।

300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज इस समझौते का सबसे चौंकाने वाला पहलू ईरान के लिए 300 अरब डॉलर का आर्थिक और पुनर्निर्माण कार्यक्रम है, जिसे अमेरिका का समर्थन प्राप्त है। यह राशि ईरान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और युद्धग्रस्त क्षेत्रों में विकास के लिए उपयोग की जाएगी।

शांति की ओर बड़ा कदम समझौते में लेबनान सहित पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में संघर्ष को रोकने पर जोर दिया गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघाई ने स्पष्ट किया है कि भले ही होर्मुज जलमार्ग पर ईरान की संप्रभुता बनी रहेगी, लेकिन वे सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी का काम कर सकता है, क्योंकि इससे तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार में स्थिरता आएगी।

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