फिर गूंजेगी खुकुरी की दहाड़: दार्जिलिंग से सीएम सुवेंदु का बड़ा ऐलान, 1000 गोरखा युवाओं की होगी बहाली
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पश्चिम बंगाल की सत्ता में बदलाव के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दार्जिलिंग की पहाड़ियों से एक ऐसा दांव खेला है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सीएम ने ऐतिहासिक ईस्टर्न फ्रंटियर राइफल्स (EFR) को पुनर्जीवित करने का संकल्प लेते हुए 1,000 से अधिक गोरखा युवाओं की भर्ती का बड़ा ऐलान किया है।

गोरखा अस्मिता को नई धार दार्जिलिंग के कुर्सियांग में जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम सुवेंदु ने बताया कि इस भर्ती प्रक्रिया में 30 फीसदी पद हमारी बेटियों और महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। जानकारों का मानना है कि यह केवल सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि उत्तर बंगाल के गोरखा समुदाय के गौरव और उनकी ऐतिहासिक पहचान को वापस लौटाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

टीएमसी पर गंभीर आरोप इस फैसले के बाद दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू बिष्ट ने ममता बनर्जी की पूर्व सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने जानबूझकर इस जांबाज फोर्स को खत्म करने की साजिश रची थी।

सांसद के अनुसार, 2010 के बाद से ईएफआर में कोई भर्ती नहीं हुई, जिससे 2,000 से ज्यादा पद खाली पड़े थे। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी ने इसकी तीन बटालियनों को घटाकर दो कर दिया, ताकि इस ऐतिहासिक बल का अस्तित्व ही समाप्त हो जाए।

रणभूमि का वीर इतिहास ईस्टर्न फ्रंटियर राइफल्स का इतिहास 18वीं सदी से जुड़ा है। यह फोर्स न केवल प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध, बल्कि 1962, 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी अपनी वीरता का लोहा मनवा चुकी है। जय मां काली, आयो गोरखाली के उद्घोष के साथ दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाली इस फोर्स का प्रतीक चिन्ह खुकुरी है, जो गोरखा समुदाय की आन-बान-शान मानी जाती है।

राजनीतिक संदेश बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के दौरान ईएफआर को फिर से मजबूत करने का वादा किया था। अब सीएम सुवेंदु के इस फैसले से यह स्पष्ट है कि भाजपा उत्तर बंगाल में गोरखा समुदाय के साथ अपने रिश्तों को और प्रगाढ़ करना चाहती है। यह कदम न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पहाड़ियों के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को मजबूत करने की एक बड़ी कोशिश भी है।

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