हैट्रिक और करियर बचाने का खेल: क्रिकेट में उम्र का फर्जीवाड़ा क्यों होता है और बोर्ड कैसे खोलता है पोल?
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क्रिकेट को जेंटलमैन गेम कहा जाता है, लेकिन कई बार खिलाड़ी अपने करियर को लंबा खींचने के लिए नियमों से खिलवाड़ कर बैठते हैं। क्रिकेट के गलियारों में एज फ्रॉड (Age Fraud) एक ऐसा काला सच है, जो जूनियर स्तर पर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। आखिर खिलाड़ी अपनी उम्र कम क्यों बताते हैं और बोर्ड इस जालसाजी को कैसे पकड़ता है? आइए समझते हैं।

खिलाड़ी क्यों करते हैं एज फ्रॉड ?

उम्र छिपाने के पीछे सबसे बड़ा कारण लंबे समय तक खेलना और शॉर्टकट अपनाना है। जूनियर स्तर पर अंडर-16 और अंडर-19 टूर्नामेंट्स में जगह बनाने के लिए खिलाड़ी अपनी उम्र कम दिखाते हैं। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य ये होते हैं:

फर्जीवाड़े की भेंट चढ़े कई सितारे

भारत में भी ऐसे कई उदाहरण रहे हैं। प्रिंस यादव जैसे खिलाड़ी इसका शिकार हो चुके हैं, जिन्हें 2019 में बीसीसीआई के फर्जीवाड़े संबंधी नियमों के तहत 2 साल का बैन झेलना पड़ा था। उन्होंने अंडर-19 सर्किट में खेलने के लिए अपनी उम्र पांच साल कम बताई थी। वहीं, वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को लेकर भी उनकी उम्र पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, हालांकि वे इन आरोपों से मुक्त रहे हैं।

उम्र की जांच का साइंटिफिक तरीका

अब केवल जन्म प्रमाण पत्र पर निर्भर नहीं रहा जाता। क्रिकेट बोर्ड खिलाड़ियों की असल उम्र का पता लगाने के लिए आधुनिक तरीकों का सहारा ले रहे हैं:

  1. दस्तावेजों की गहन छानबीन: सबसे पहले जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड, आधार कार्ड और पासपोर्ट का मिलान किया जाता है। अगर इन दस्तावेजों में विसंगतियां हैं, तो जांच शुरू हो जाती है।
  2. TW3 बोन टेस्ट (Bone Test): बीसीसीआई समेत दुनिया भर के बोर्ड खिलाड़ियों की कलाई और हाथ की हड्डियों का एक्स-रे (TW3 टेस्ट) करवाते हैं। इससे हड्डियों की परिपक्वता (maturity) का पता चलता है, जिससे उम्र का सटीक अनुमान लग जाता है।
  3. मेडिकल जांच: जब दस्तावेजों और शारीरिक विकास (Physical growth) में बड़ा अंतर दिखता है, तब बोर्ड विशेष मेडिकल जांच का निर्देश देते हैं।

क्या बोन टेस्ट 100% सटीक होता है?

इसका जवाब है—नहीं। बोन टेस्ट उम्र का केवल एक वैज्ञानिक अनुमान देता है। इसमें एक-दो साल का अंतर संभव है। यही वजह है कि क्रिकेट बोर्ड केवल इसी टेस्ट पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि इसे दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड्स के साथ जोड़कर देखते हैं ताकि किसी निर्दोष खिलाड़ी पर गलत आरोप न लगे।

दोषी पाए जाने पर क्या सजा मिलती है?

उम्र में धोखाधड़ी करना खेल की भावना के खिलाफ है और इसके गंभीर परिणाम होते हैं:

क्रिकेट में जीत का मजा तभी है जब वह ईमानदारी और योग्यता के दम पर हासिल की जाए। उम्र का फर्जीवाड़ा न केवल खिलाड़ी की साख खराब करता है, बल्कि यह उन प्रतिभावान खिलाड़ियों का हक भी मारता है जो वास्तव में उस उम्र के दायरे में आते हैं।

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