शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत एक बार फिर अपनी तीखी भाषा के कारण चर्चा में हैं। बागी सांसदों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोपों पर राउत ने न केवल अपना बचाव किया, बल्कि इसे पूरी तरह जायज ठहराया है।
सामने वाले को वैसी ही भाषा की जरूरत राउत ने अपने बचाव में कहा कि राजनीति में कई बार ऐसी परिस्थितियां आती हैं जहां भावनाओं को सीधे और कड़े शब्दों में व्यक्त करना जरूरी होता है। उन्होंने तर्क दिया कि वे जानते हैं कि सार्वजनिक जीवन में मर्यादा क्या होती है, लेकिन सामने वाला जिस भाषा को समझता है, उसे उसी भाषा में जवाब देना पड़ता है।
क्या बागी सम्मान के काबिल हैं? बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए राउत ने सवाल किया कि जो लोग पार्टी के साथ गद्दारी करते हैं, उनके साथ कैसा बर्ताव किया जाए? उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, अगर कोई व्यक्ति 15 करोड़ रुपये लेकर पार्टी छोड़ देता है, तो उसके लिए क्या कहा जाए? क्या ऐसे लोगों पर फूलों की बारिश की जानी चाहिए?
संसदीय मर्यादा पर क्या बोले राउत? विवाद बढ़ता देख राउत ने यह स्पष्ट किया कि उन्हें मंचों की गरिमा का पूरा ख्याल रहता है। उन्होंने दावा किया कि संसद जैसी संवैधानिक संस्था के भीतर उन्होंने कभी ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया है। उनके अनुसार, यह भाषा केवल उन मंचों के लिए है जहां राजनीतिक विरोधियों को जवाब देना अनिवार्य होता है।
पुराने बयानों से भी रहा है नाता यह पहली बार नहीं है जब राउत अपनी बयानबाजी को लेकर विवादों में घिरे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना औरंगजेब से की थी, जिस पर तब भी भारी हंगामा हुआ था। पीएम ने खुद इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यह 104वीं बार है जब उनके खिलाफ ऐसी अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया है।
महाराष्ट्र की राजनीति में गरमाया माहौल शिवसेना के दो फाड़ होने के बाद से ही उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राउत का यह बयान राज्य में दल-बदल और राजनीतिक वफादारी पर चल रही बहस को और अधिक आक्रामक बना सकता है। फिलहाल, इस बयान के बाद महाराष्ट्र में एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ गया है।
#WATCH | Delhi | On the abusive language used by him for rebel MPs, Shiv Sena UBT MP Sanjay Raut says, We use such words in Marathi language. What is wrong in it? I very well know which language to use and when. Only a language which a person understands must be used. I have not… pic.twitter.com/F1Bs86fMcR
— ANI (@ANI) June 17, 2026
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