चीन का डिजिटल छलावा : सोशल मीडिया पर खुली चमक-धमक वाली प्रोपेगेंडा की पोल
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चीन अक्सर अपनी आधुनिक इमारतों, चमचमाती सड़कों और अनुशासित नागरिकों की तस्वीरों के जरिए खुद को दुनिया के सामने एक सुपरपावर के रूप में पेश करता है। सोशल मीडिया पर दिखने वाले ये वीडियो अक्सर हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि आखिर चीन ने इतनी जल्दी इतनी तरक्की कैसे कर ली? लेकिन क्या यह हकीकत है या बस एक सोची-समझी साजिश? हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो ने चीन की इस सभ्य और विकसित छवि के पीछे की काली सच्चाई को उजागर कर दिया है।

सड़कों पर तड़पता इंसान और बेपरवाह भीड़ हाल ही में घर के कलेश नाम के एक यूजर ने एक वीडियो शेयर किया, जिसे देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया। वीडियो में एक महिला सड़क के बीचों-बीच दुर्घटना के बाद गिरी हुई नजर आ रही है, लेकिन आसपास से गुजरने वाले लोग उसे उठाने या एम्बुलेंस बुलाने के बजाय अपने मोबाइल से वीडियो बनाने में व्यस्त हैं। यह वीडियो चीन के उस दावे को खारिज करता है जहाँ नागरिकों को अति-अनुशासित दिखाया जाता है।

हॉस्टल और गंदगी का नर्क चीन की पोल सिर्फ सड़कों तक ही सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक अन्य वीडियो में वहां के एक कॉलेज हॉस्टल की बदहाली दिखाई गई है। हॉस्टल में छात्रों के रहने की स्थिति बेहद दयनीय है, जहाँ न तो साफ-सफाई है और न ही बुनियादी सुविधाएं। वहीं, एक अन्य वीडियो में चीन का एक बीच दिखाया गया है, जहाँ मुंबई के जुहू बीच से भी बदतर गंदगी पसरी हुई है। गंदगी और खराब सिविक सेंस के ये दृश्य चीन के क्लीन एंड ग्रीन विज्ञापनों पर बड़े सवाल खड़े करते हैं।

इन्फ्लुएंसर्स का प्रोपेगेंडा और हकीकत सवाल उठता है कि आखिर चीन की इतनी परफेक्ट छवि बनी कैसे? विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने अपनी छवि सुधारने के लिए एक सुनियोजित नीति अपनाई है। सरकार विदेशी इन्फ्लुएंसर्स को भुगतान करके उन्हें चीन बुलाती है, जहाँ उन्हें लग्जरी सुविधाएं दी जाती हैं ताकि वे देश की झूठी और चमकदार तस्वीर दुनिया के सामने पेश कर सकें।

भारतीय युवाओं ने तोड़ी डिजिटल दीवार चीन ने अपनी सूचनाओं पर हमेशा से कड़ा पहरा रखा है। वह तय करता है कि दुनिया तक क्या पहुँचेगा और क्या नहीं। लेकिन अब भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स चीन की इस डिजिटल दीवार को ढहा रहे हैं। वे उन तस्वीरों और वीडियो को साझा कर रहे हैं जिन्हें चीन की सरकारी मशीनरी दुनिया से छुपाने की कोशिश करती है।

क्या चीन वाकई वैसा है जैसा वह दिखता है? सोशल मीडिया पर बढ़ती यह बहस इशारा कर रही है कि चीन की चमचमाती दुनिया सिर्फ एक प्रॉपेगेंडा है, जिसके पीछे भुखमरी, गंदगी और बदहाली का एक अलग ही सच छिपा हुआ है।

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