गद्दारी की तो सड़क पर नहीं घूमने देगी जनता , बगावत की खबरों पर संजय राउत का तीखा प्रहार
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महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों शिवसेना (यूबीटी) में टूट की अटकलें जोरों पर हैं। ऑपरेशन टाइगर और सांसदों के पाला बदलने की चर्चाओं के बीच पार्टी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दिल्ली में मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने बगावत के दावों को सिरे से खारिज करते हुए गद्दारों को गंभीर चेतावनी दी है।

सांसदों को खरीदने का सनसनीखेज दावा दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय राउत ने आरोप लगाया कि पार्टी के सांसदों को तोड़ने के लिए भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल किया गया। राउत ने दावा किया कि प्रत्येक सांसद को 15-15 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी। उनके अनुसार, इन सांसदों को लेने के लिए पुणे और नांदेड़ से चार्टर्ड प्लेन भेजे गए थे, जिसमें शर्त यह थी कि प्लेन में बैठने से पहले पैसे का भुगतान नकद मिलना चाहिए।

साईं बाबा और माता की कसम खाई है राउत ने अपने सांसदों की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे गुट के सभी सदस्य पूरी तरह एकजुट हैं। उन्होंने कहा, हमारे सहयोगियों ने शिरडी के साईं बाबा, तुलजा भवानी और अपनी सगी मां की कसम खाई है कि वे उद्धव ठाकरे का साथ नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि इस पवित्र शपथ को तोड़कर किसी ने पीठ में छुरा घोंपा, तो महाराष्ट्र की जनता और वफादार शिवसैनिक उन्हें सड़क पर चैन से घूमने नहीं देंगे।

बालासाहेब के नाम पर मांगा था वोट संजय राउत ने बागियों को आईना दिखाते हुए कहा कि ये सांसद मोदी या एकनाथ शिंदे के नाम पर नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे और उद्धव ठाकरे के चेहरे पर जीतकर आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे लोग मशाल चुनाव चिह्न पर जनता का जनादेश लेकर आए हैं, इसलिए विश्वासघात का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा।

कानूनी दांव-पेंच और व्हिप जारी पार्टी में टूट की आशंकाओं को देखते हुए शिवसेना (यूबीटी) ने कमर कस ली है। संजय राउत ने बताया कि पार्टी ने संसदीय दल की बैठक के लिए व्हिप जारी कर दिया है। वहीं, लोकसभा में पार्टी के नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संविधान की सुरक्षा का आग्रह किया है।

क्या है स्थिति? फिलहाल, अटकलें यह हैं कि उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 6 सांसद पाला बदल सकते हैं। हालांकि, संजय राउत ने दावा किया है कि वे लगातार सभी सांसदों के संपर्क में हैं और पार्टी पूरी मजबूती के साथ उद्धव ठाकरे के पीछे खड़ी है। दिल्ली में हलचल तेज है और एकनाथ शिंदे के भी राजधानी पहुंचने की सूचना है, जिससे महाराष्ट्र का सियासी पारा एक बार फिर चरम पर है।

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