आसमान में काल का साया: एक ही दिन में राख हुए अमेरिका और रूस के दो महाकाय बमवर्षक
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शीत युद्ध के दो सबसे बड़े धुरंधरों—अमेरिका और रूस—के लिए सोमवार का दिन काले सोमवार के रूप में दर्ज हो गया है। दुनिया को अपनी सैन्य ताकत का अहसास कराने वाले दो दिग्गज स्ट्रैटेजिक बॉम्बर्स एक ही दिन भीषण दुर्घटनाओं का शिकार हो गए। जहां अमेरिका में 8 लोगों की मौत ने कोहराम मचा दिया, वहीं रूस में पायलटों का बाल-बाल बचना एक चमत्कार माना जा रहा है।

अमेरिका में मौत का तांडव : 8 की गई जान कैलिफोर्निया के एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर उस वक्त मातम पसर गया, जब अमेरिका का गौरव कहे जाने वाले B-52 स्ट्रेटोफोर्ट्रेस ने उड़ान भरने के तुरंत बाद ही आग पकड़ ली। एयर फोर्स के अधिकारियों के अनुसार, यह विमान रनवे के पास ही आग के गोले में तब्दील हो गया। इस हादसे में विमान में सवार सभी 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मरने वालों में सैन्य कर्मियों के साथ-साथ बोइंग कंपनी के विशेषज्ञ और ठेकेदार भी शामिल थे। मलबे के कारण आसपास का इलाका किसी श्मशान में तब्दील हो गया था।

रूस में चमत्कार : मौत को मात देकर लौटे जांबाज दूसरी ओर, साइबेरिया के इरकुत्स्क में एक प्रशिक्षण उड़ान के दौरान रूस का घातक Tu-22M3 बॉम्बर क्रैश हो गया। हालांकि, यहां राहत भरी खबर रही कि पायलटों ने समय रहते इजेक्ट कर अपनी जान बचा ली। विमान घने जंगलों में गिरा, जिससे आबादी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज में विमान को सीधे जमीन में समाते और आग के गुबार उठते देखा जा सकता है।

परमाणु हमले में सक्षम हैं ये आसमान के शिकारी ये दोनों विमान शीत युद्ध के दौर के इंजीनियरिंग करिश्मे हैं। अमेरिकी B-52 विमान 50,000 फीट की ऊंचाई से 70,000 पाउंड से अधिक परमाणु और पारंपरिक हथियार ले जाने की क्षमता रखता है। वहीं, रूसी Tu-22M3 एक सुपरसोनिक बॉम्बर है, जो हाइपरसोनिक किंजल मिसाइलें दागने के लिए कुख्यात है और यूक्रेन युद्ध में भी सक्रिय रहा है।

जांच के घेरे में महा-दुर्घटना विशालकाय बमवर्षकों के एक ही दिन क्रैश होने की घटना ने रक्षा विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए विमानों के विकास में देरी के कारण, दोनों महाशक्तियां आज भी दशकों पुराने मॉडलों पर ही अपनी रक्षा नीति टिकाए हुए हैं, जो अब तकनीकी रूप से जोखिम भरे साबित हो रहे हैं। फिलहाल, दोनों देशों ने हादसों की उच्च-स्तरीय जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह महज एक इत्तेफाक था या किसी बड़ी तकनीकी खामी का नतीजा।

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