क्या MBA और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का दौर खत्म हो गया? CEA ने दी युवाओं को सख्त चेतावनी
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भारत में पिछले कई दशकों से इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर कोडिंग या प्रतिष्ठित कॉलेज से MBA करना करियर की सबसे सुरक्षित और गारंटीड सीढ़ी माना जाता रहा है। हर साल लाखों छात्र हाई-पेइंग जॉब के सपने के साथ इन डिग्रियों के पीछे भागते हैं। लेकिन क्या आज के बदलते दौर में इन डिग्रियों की प्रासंगिकता कम हो गई है?

भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंता नागेश्वरन ने इस पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने युवाओं को आगाह किया है कि वह दौर अब इतिहास बन चुका है, जहां सिर्फ एक डिग्री आपके करियर की नैया पार लगा देती थी।

क्यों खत्म हुआ MBA और सॉफ्टवेयर का एक्स्ट्रा एडवांटेज ?

एक हालिया पॉडकास्ट में CEA ने स्पष्ट किया कि ग्लोबलाइजेशन के शुरुआती दौर में सॉफ्टवेयर और MBA जैसी डिग्रियों को जो विशेष लाभ मिलता था, वह अब समाप्त हो चुका है।

उन्होंने चिंता जताई कि भारत में युवा बिना सोचे-समधे ग्रेजुएशन के बाद सीधे पोस्ट-ग्रेजुएशन या UPSC की दौड़ में शामिल हो जाते हैं। वे यह परखने की कोशिश नहीं करते कि क्या उनकी पढ़ाई आज के बाजार के हिसाब से सस्टेनेबल रोजगार दे पाएगी। AI और ऑटोमेशन के इस युग में कोडिंग, डेटा एंट्री और मैनेजमेंट के बुनियादी काम मशीनें खुद कर रही हैं, जिससे किताबी ज्ञान वाली डिग्रियों का महत्व गिर रहा है।

ट्रेड स्किल्स में छिपा है असली भविष्य

नागेश्वरन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में वेल्डिंग, प्लंबिंग, कारपेंट्री और इलेक्ट्रिकल जैसे ट्रेड स्किल्स को हीन दृष्टि से देखा जाता है। इसके विपरीत, जर्मनी, जापान, स्विट्जरलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित देशों में इन कौशलों का न केवल अत्यधिक सम्मान है, बल्कि इनमें कमाई के भी बेहतरीन मौके हैं।

उन्होंने साफ कहा कि ये ऐसे हुनर हैं जिन्हें AI कभी नहीं छीन पाएगा। भविष्य उन लोगों का है जिनके पास ट्रेड स्किल्स और ऐसी सॉफ्ट स्किल्स हैं, जहां इंसानी बुद्धिमत्ता अनिवार्य है।

केवल डिग्री नहीं, सेहत भी है जरूरी

CEA ने युवाओं की सफलता को उनकी शारीरिक सेहत से जोड़ते हुए एक गंभीर चेतावनी दी है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि खराब जीवनशैली और कम फिजिकल एक्टिविटी के कारण युवाओं में मोटापा बढ़ रहा है।

उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि करियर की दौड़ में खुद को झोंकने के साथ-साथ अपनी फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर निवेश करना भी उतना ही जरूरी है। अंत में, संदेश साफ है: केवल डिग्री के पीछे भागना बंद करें, बाजार की मांग को समझें और ऐसे कौशल विकसित करें जिनका विकल्प मशीनें न बन सकें।

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