क्या खत्म हो गया MBA और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का दौर? CEA के बयान से मचा हड़कंप
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भारत में हर साल लाखों युवा लाखों रुपये खर्च कर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और MBA जैसी डिग्रियां हासिल करते हैं। लेकिन मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन के एक ताजा बयान ने इस पूरे पारंपरिक एजुकेशन सिस्टम की नींव हिला दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि सिर्फ किताबी डिग्रियों के भरोसे नौकरी मिलना अब नामुमकिन है।

सॉफ्टवेयर और MBA का स्वर्ण युग अब इतिहास नागेश्वरन के अनुसार, ग्लोबलाइजेशन के दौर में सॉफ्टवेयर और मैनेजमेंट की पढ़ाई का जो दबदबा था, वह अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है। उन्होंने युवाओं को चेताया है कि वे बिना सोचे-समझे भीड़ का हिस्सा न बनें। उनके मुताबिक, अब वह दौर आ गया है जहां सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि ट्रेड स्किल्स और ऐसी मानवीय क्षमताएं काम आएंगी जिन्हें रोबोट या AI कभी नहीं छीन सकते।

AI के युग में ह्यूमन टच ही असली पूंजी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के डर के बीच, CEA ने एक शेफ का उदाहरण साझा किया। उन्होंने समझाया कि खाना पकाने जैसी कला या केयरगिविंग (देखभाल), काउंसलिंग और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में इंसानी संवेदना की जरूरत होती है। ऐसी नौकरियां AI के दौर में सुरक्षित रहेंगी, क्योंकि मशीनें संवेदना या मानवीय स्पर्श की नकल नहीं कर सकतीं।

ट्रेड स्किल्स को छोटा समझना भारी भूल नागेश्वरन ने भारत की सामाजिक सोच पर कड़ा तंज कसा। उन्होंने कहा कि हमारे देश में वेल्डिंग, प्लंबिंग, बढ़ईगीरी और इलेक्ट्रिकल जैसे कामों को छोटा समझा जाता है। जबकि जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड जैसे विकसित देशों में इन स्किल्स को सबसे ज्यादा सम्मान और पैसा मिलता है। उन्होंने सलाह दी कि युवाओं को UPSC या अन्य डिग्री की अंधी दौड़ के बजाय व्यावहारिक (Practical) कौशल पर ध्यान देना चाहिए।

अमीर होने से पहले ही बीमार हो रहा है भारत? करियर के साथ-साथ CEA ने देश की स्वास्थ्य स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत अमीर होने से पहले बूढ़ा होने के बजाय खुशहाल होने से पहले अस्वस्थ होने की ओर बढ़ रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, बदलती जीवनशैली और शारीरिक मेहनत की कमी से युवाओं में बीमारियां बढ़ रही हैं। नागेश्वरन का स्पष्ट संदेश है: यदि आप शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, तो आपकी प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन का कोई मोल नहीं रह जाएगा। एक अस्वस्थ नागरिक कभी भी न तो खुद तरक्की कर सकता है और न ही देश की प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकता है।

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