DRDO का ब्रह्मास्त्र : 1000 किमी दूर दुश्मन का काम तमाम करेगी नई LRLACM मिसाइल
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भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों में एक और मील का पत्थर स्थापित कर दिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आइलैंड से नई लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण किया है। यह उपलब्धि चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों की चिंता बढ़ाने के लिए काफी है।

निर्भय का उन्नत संस्करण, अचूक निशाना

यह नई क्रूज़ मिसाइल निर्भय का एक अत्याधुनिक और एडवांस्ड वर्जन है। पिछले प्रोजेक्ट्स में आई तकनीकी चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए, इस बार बेहतर गाइडेंस सिस्टम और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। 15 जून को हुए इसके सफल टेस्ट में मिसाइल ने 1000 किलोमीटर दूर स्थित अपने लक्ष्य को पूरी सटीकता के साथ ध्वस्त कर दिया।

राडार को चकमा देने में माहिर

इस मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसकी सबसोनिक क्षमता है। यह करीब 0.8 मैक की गति से जमीन के बेहद करीब उड़ान भर सकती है। कम ऊंचाई पर उड़ने के कारण यह दुश्मन के रडार सिस्टम की पकड़ में आसानी से नहीं आती। इसमें 500 किलोग्राम तक वजनी वॉरहेड ले जाने की क्षमता है, जो टारगेट को पलक झपकते ही मलबे में तब्दील कर सकता है।

मल्टी-प्लेटफॉर्म लॉन्च की सुविधा

LRLACM की बहुमुखी प्रतिभा इसे और भी घातक बनाती है। इसे जमीन, समुद्र और अन्य सैन्य प्लेटफॉर्म्स से आसानी से लॉन्च किया जा सकता है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, सेना में शामिल होने से पहले अभी दो और डेवलपमेंटल टेस्ट और उसके बाद दो यूजर ट्रायल किए जाएंगे। अगले दो वर्षों में यह मिसाइल पूरी तरह से भारतीय सेना के बेड़े का हिस्सा बन सकती है।

पड़ोसी देशों के लिए क्यों है यह चुनौती?

दक्षिण एशिया में मिसाइल रेस काफी तेज है। पाकिस्तान के पास वर्षों से 900 किमी रेंज वाली बाबर मिसाइल है, जबकि चीन के पास कई परमाणु और पारंपरिक क्रूज़ मिसाइलें मौजूद हैं। भारत की यह नई मिसाइल न केवल क्षेत्रीय सामरिक संतुलन को भारत के पक्ष में मजबूत करेगी, बल्कि स्टैंड-ऑफ वेपन के रूप में आधुनिक युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

सैन्य क्षमता में बड़ा इजाफा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल भारतीय रॉकेट और मिसाइल रेजिमेंट की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। आधुनिक युद्धक्षेत्र में लंबी दूरी से दुश्मन को नेस्तनाबूद करना ही जीत की कुंजी है, और LRLACM के जरिए भारत ने उस दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा लिया है। किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए अब भारतीय सेना के पास एक अचूक और आधुनिक हथियार मौजूद होगा।

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