टीएमसी में अपनों की बगावत? ममता की भाभी का सुवेंदु के मंच पर दिखना बनी नई चर्चा
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तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी उथल-पुथल अब ममता बनर्जी के घर की दहलीज तक पहुंच गई है। पार्टी के दिग्गज नेताओं और सांसदों की नाराजगी के बीच, सोमवार को ममता की भाभी कजरी बनर्जी की मौजूदगी ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

सुवेंदु के कार्यक्रम में कजरी की मौजूदगी कोलकाता नगर निगम (KMC) में आयोजित एक स्वच्छता कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ कजरी बनर्जी मंच साझा करती नजर आईं। दिलचस्प बात यह है कि इस कार्यक्रम में टीएमसी के बागी खेमे की प्रमुख चेहरा मानी जा रहीं सांसद माला रॉय भी मौजूद थीं। सीएम बनने के बाद सुवेंदु के पहले आधिकारिक केएमसी दौरे पर इन चेहरों का दिखना कई बड़े सियासी संकेतों की ओर इशारा कर रहा है।

क्या ये बगावती सुर हैं? यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब टीएमसी के कई बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय और केंद्र में एनडीए को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। सांसद माला रॉय का सुवेंदु अधिकारी के साथ एक मंच पर दिखना इस चर्चा को और हवा दे रहा है कि तृणमूल के अंदरूनी संकट का दायरा अब ममता के करीबियों तक फैल चुका है।

प्रशासनिक या राजनीतिक? कजरी ने दी सफाई विवाद और चर्चाओं के बीच, कजरी बनर्जी ने इसे पूरी तरह से गैर-राजनीतिक करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी भागीदारी केवल कोलकाता के विकास कार्यों और नागरिक सेवाओं को सुचारू रखने के उद्देश्य से थी। कजरी ने कहा, सरकार द्वारा विपक्षी नेताओं को आमंत्रित करना विकास के प्रति एक सकारात्मक कदम है।

केएमसी बोर्ड भंग होने के बाद का घटनाक्रम 9 जून को फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद राज्य सरकार ने टीएमसी नियंत्रित केएमसी बोर्ड को भंग कर प्रशासक नियुक्त कर दिया था। इस बदलाव के बाद आयोजित पहले आधिकारिक कार्यक्रम में तृणमूल के पूर्व पार्षदों और बीजेपी नेताओं का एक साथ दिखना, राज्य की बदलती राजनीतिक हकीकत को बयां कर रहा है।

बढ़ता जा रहा है टीएमसी का आंतरिक संकट एक तरफ जहां पार्टी के नेता बागी तेवर अपना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के अंदर छींटाकशी और हमलों के मामले भी बढ़ रहे हैं। हाल ही में विधायक कुणाल घोष पर हुए हमले की घटना ने टीएमसी के भीतर जारी असुरक्षा और गुटबाजी को जगजाहिर कर दिया है। ममता बनर्जी के लिए आने वाले दिन अपनी पार्टी को एकजुट रखने के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।

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