भारत ने अपनी रक्षा शक्ति को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। 10 और 11 जून को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का सफल फाइनल डेवलपमेंटल टेस्ट पूरा कर लिया। इस कामयाबी के साथ ही भारत अब उन चुनिंदा वैश्विक शक्तियों में शामिल हो गया है, जिनके पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को हवा में ही ढेर करने की क्षमता है।
आसमान में दोहरी मार हालिया परीक्षण में DRDO ने दो इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग किया। इन मिसाइलों ने दुश्मन की डमी बैलिस्टिक मिसाइलों को न केवल ट्रैक किया, बल्कि उन्हें सटीक तरीके से नष्ट भी किया। इस दौरान एक लक्ष्य को वायुमंडल के भीतर (Endo-Atmosphere) और दूसरे को अंतरिक्ष की सीमा के पास यानी वायुमंडल के बाहर (Exo-Atmosphere) निशाना बनाया गया। यह साबित करता है कि भारत का सुरक्षा घेरा अब बहुस्तरीय और अभेद्य है।
क्यों अहम है यह BMD प्रोग्राम? भारत ने 1999 में इस कार्यक्रम की नींव रखी थी। इसका मुख्य उद्देश्य पड़ोसी देशों की बढ़ती परमाणु और मिसाइल क्षमताओं से निपटना था। आज यह सिस्टम दो स्तरों पर काम करता है:
स्वॉर्डफिश रडार: सिस्टम की आंखें इस पूरे डिफेंस नेटवर्क की ताकत इसका स्वॉर्डफिश (Swordfish) रडार है। यह रडार किसी भी संदिग्ध मिसाइल को बहुत लंबी दूरी से ही ट्रैक कर लेता है। मोबाइल लॉन्चर, मिशन कंट्रोल सेंटर और अत्याधुनिक कम्युनिकेशन नेटवर्क के तालमेल से यह सिस्टम एक खतरनाक हंटर की तरह काम करता है, जिससे दुश्मन की मिसाइल के बच निकलने की गुंजाइश शून्य हो जाती है।
अगला चरण: हाइपरसोनिक हथियारों का काल DRDO अब इस प्रोजेक्ट के तीसरे और अंतिम चरण पर काम कर रहा है। इसमें AD-AH और AD-AM जैसी नई पीढ़ी की इंटरसेप्टर मिसाइलें विकसित की जा रही हैं। ये मिसाइलें न केवल साधारण मिसाइलों को, बल्कि हाइपरसोनिक हथियारों और MIRV (एक साथ कई लक्ष्य भेदने वाली मिसाइलें) तकनीक को भी नाकाम करने में सक्षम होंगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर बताया है। DRDO के आगामी मिशन अब यह स्पष्ट कर रहे हैं कि भविष्य के युद्ध में भारत की तैयारी दुनिया के सबसे आधुनिक देशों के बराबर खड़ी है।
*The @DRDO_India has successfully demonstrated multiple crucial technologies bolstering nations defence capabilities against different types of enemy threats.
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) June 13, 2026
Three consecutive flight-tests were successfully conducted to demonstrate multi-layered defence against long range… pic.twitter.com/0DKQF0LB30
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