आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में एक अभूतपूर्व और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सरकार ने एक कड़े एक्सपोर्ट-कंट्रोल आदेश के जरिए AI स्टार्टअप एंथ्रोपिक (Anthropic) को अपने सबसे शक्तिशाली मॉडल्स— क्लाउड फेबल 5 (Claude Fable 5) और मिथोस 5 (Mythos 5)—का एक्सेस भारतीयों समेत सभी विदेशी नागरिकों के लिए तुरंत ब्लॉक करने का निर्देश दिया है। 12 जून को जारी इस आदेश के बाद इन मॉडल्स को वैश्विक स्तर पर ऑफलाइन कर दिया गया है।
इतिहास में पहली बार: हार्डवेयर नहीं, सीधे सॉफ्टवेयर पर डिजिटल पाबंदी यह प्रतिबंध सामान्य नहीं है। यह नियम केवल अमेरिका से बाहर ही नहीं, बल्कि अमेरिका की धरती पर मौजूद विदेशी नागरिकों और यहां तक कि एंथ्रोपिक के अपने विदेशी कर्मचारियों पर भी लागू होता है। कंपनी ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि नियमों के अनुपालन के लिए उन्हें इन मॉडल्स को बंद करना पड़ा है। हालांकि कंपनी के पुराने मॉडल्स काम कर रहे हैं, लेकिन अत्याधुनिक तकनीक पर अचानक लगे इस ताले ने वैश्विक टेक जगत में हलचल मचा दी है।
वॉशिंगटन क्यों है खौफ में? छिपा है जेलब्रेक का डर अमेरिकी वाणिज्य विभाग के इस कदम के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर खतरा बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेज़ॅन के रिसर्चर्स ने एंथ्रोपिक के मॉडल्स में कुछ ऐसी खामियां (Vulnerabilities) खोजी थीं, जिनके जरिए इसके सेफ्टी गार्डरेल्स को जेलब्रेक किया जा सकता था। अधिकारियों को डर है कि यदि मिथोस 5 की साइबर-सुरक्षा क्षमताएं गलत हाथों में पड़ गईं, तो इसका इस्तेमाल बैंकों, सरकारी प्रणालियों और देश के महत्वपूर्ण ढांचे (Critical Infrastructure) पर विनाशकारी साइबर हमले करने के लिए किया जा सकता है।
पर्दे के पीछे की जंग: ट्रम्प प्रशासन बनाम एंथ्रोपिक सूत्रों का दावा है कि यह प्रतिबंध केवल सुरक्षा कारणों से नहीं, बल्कि एंथ्रोपिक और ट्रम्प प्रशासन के बीच जारी खींचतान का परिणाम है। खबरों के मुताबिक, एंथ्रोपिक ने अमेरिकी सरकार को अपने AI मॉडल्स का इस्तेमाल घरेलू निगरानी और खुद से चलने वाले घातक हथियारों (Autonomous Weapons) के लिए करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इस इंकार के बाद पेंटागन ने कंपनी को सप्लाई-चेन रिस्क करार दिया था। यह विवाद ऐसे समय में हुआ है जब एंथ्रोपिक अपने 1 ट्रिलियन डॉलर के IPO की तैयारी कर रही है।
भारत के लिए वेक-अप कॉल : वैश्वीकरण का अंत? इस प्रतिबंध ने भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ा दी है, जो अपनी तकनीकी जरूरतों के लिए सिलिकॉन वैली पर निर्भर हैं। जोहो (Zoho) के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने इसे स्पष्ट चेतावनी माना है। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण अब खत्म हो चुका है।
भारत अब यह मानकर नहीं चल सकता कि उसे हमेशा वैश्विक तकनीक का एक्सेस मिलता रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत ने अभी अपनी सॉवरेन (स्वतंत्र) AI क्षमताएं विकसित नहीं कीं और घरेलू रिसर्च पर ध्यान नहीं दिया, तो इस नई डिजिटल दुनिया में पिछड़ना तय है। यह घटना केवल एक प्रतिबंध नहीं, बल्कि भविष्य की AI रेस का एक नया और खौफनाक अध्याय है।
ANTHROPIC SUSPENDS GLOBAL ACCESS TO MYTHOS FABLE 5
— CryptoGoos (@cryptogoos) June 13, 2026
🇺🇸 The US government just ordered Anthropic to suspend foreign access to Mythos Fable 5 AI model, citing national security concerns.
Anthropic has now disabled access for all users worldwide. pic.twitter.com/YatIRsGaUM
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