टीएमसी में गृहयुद्ध: कल्याण बनर्जी के अहंकार वाले हमले पर अभिषेक बनर्जी का संयमित पलटवार
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तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर की अंदरूनी कलह अब खुलकर सड़क पर आ गई है। पार्टी के दिग्गज नेता और सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा अभिषेक बनर्जी पर लगाए गए गंभीर आरोपों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। शुक्रवार देर शाम अभिषेक बनर्जी ने आखिरकार इस पूरे विवाद पर चुप्पी तोड़ी है।

अभिषेक की नपी-तुली प्रतिक्रिया कल्याण बनर्जी के तीखे हमलों के बावजूद अभिषेक बनर्जी ने संयम बरतते हुए कहा, कल्याण बनर्जी उम्र में मुझसे काफी बड़े हैं। उन्होंने मुझे बचपन से देखा है और उन्हें अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है। मैं उनके खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोलूंगा। अभिषेक का यह रुख जहां एक ओर परिपक्वता दिखाता है, वहीं दूसरी ओर पार्टी में बढ़ते मतभेदों को भी उजागर करता है।

या तो अभिषेक या मैं : कल्याण बनर्जी का अल्टीमेटम विवाद की शुरुआत 69 वर्षीय कल्याण बनर्जी के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने ममता बनर्जी को सीधे अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन के सामने दो टूक कहा, ममता बनर्जी को फैसला करना होगा कि पार्टी में या तो अभिषेक रहेंगे या फिर मैं। लगातार बढ़ता अहंकार पार्टी को गर्त में ले जा रहा है।

कल्याण बनर्जी ने अभिषेक की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए चुनौती दी कि वे खुद को तब तक नेता नहीं मानेंगे, जब तक अभिषेक किसी अन्य राज्य (त्रिपुरा या गोवा) में चुनाव जीतकर नहीं दिखा देते।

वकालत से साइनगेट तक फैला असंतोष विवाद का एक बड़ा कारण कानूनी मामलों में उपेक्षा भी है। कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि 45 साल के अनुभव के बावजूद उन्हें नजरअंदाज कर अयान भट्टाचार्य जैसे वकीलों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा, पार्टी मेरे साथ डस्टबिन जैसा व्यवहार नहीं कर सकती।

वहीं, पार्टी के भीतर साइनगेट (Signgate) विवाद भी आग में घी का काम कर रहा है। विधानसभा में विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर के मामले में CID की जांच और पार्टी के भीतर ममता मॉडल बनाम डायमंड हार्बर मॉडल की जंग ने पुराने और नए नेताओं के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है।

क्या ममता सुलझा पाएंगी यह संकट? इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फिलहाल रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। पार्टी के पुराने वफादार जहां अपनी अनदेखी से आहत हैं, वहीं अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला युवा धड़ा संगठन पर पकड़ मजबूत करना चाहता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी कब और कैसे इस गृहयुद्ध पर लगाम लगाती हैं।

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