ग्रैंड स्लैम से गवर्नेंस तक: राजनीति के डबल्स पार्टनर बने लिएंडर पेस, जानें क्या है उनका स्पोर्ट्स विजन
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टेनिस जगत के दिग्गज और ओलंपिक पदक विजेता लिएंडर पेस अब एक नई पारी की शुरुआत कर चुके हैं। राजनीति में कदम रखने के बाद पेस ने अपने विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि देश की खेल व्यवस्था को वैज्ञानिक आधार पर खड़ा करना है।

राजनीति में डबल्स टीम का भरोसा भाजपा में शामिल होने के सवाल पर पेस ने कहा कि एक टेनिस खिलाड़ी के रूप में उन्होंने हमेशा टीम वर्क में भरोसा किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जुगलबंदी को देश की सर्वश्रेष्ठ डबल्स टीम बताया। पेस का मानना है कि मोदी-शाह के नेतृत्व में देश जिस तरह से आर्थिक ऊंचाइयों को छू रहा है, वही तालमेल भारत को खेल की दुनिया में भी वैश्विक महाशक्ति बना सकता है।

पिता का सपना और 50 करोड़ बच्चों का मिशन 18 ग्रैंड स्लैम विजेता पेस ने खुलासा किया कि उनका राजनीतिक सफर निजी महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि उनके दिवंगत पिता के सपने का विस्तार है। वे देश के 50 करोड़ बच्चों को खेल और खेल-विज्ञान से जोड़ना चाहते हैं। पेस के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रदर्शन को सुधारने के लिए जमीनी स्तर पर स्पोर्ट्स साइंस का इस्तेमाल अनिवार्य है।

पुराने सिस्टम को बदलने का ब्लूप्रिंट पेस ने वर्तमान शारीरिक शिक्षा (PT) के तरीकों को पुराना करार दिया। उन्होंने कहा कि खेलों में हमें पश्चिमी तकनीक और पूर्वी दर्शन का समन्वय चाहिए। वे बायोमैकेनिकल एनालिसिस के जरिए खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता को परखने और वैज्ञानिक तरीके से प्रतिभाएं तलाशने पर जोर दे रहे हैं। इसके लिए वे केंद्र और राज्य के बीच डबल इंजन तालमेल को जरूरी मानते हैं।

बंगाल के लिए पेस का रोडमैप पश्चिम बंगाल पर ध्यान केंद्रित करते हुए पेस ने कहा कि वहां खेल के साथ-साथ कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है। वे बंगाल में बड़े उद्योगों की वापसी चाहते हैं ताकि युवाओं को रोजगार के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े। उनका लक्ष्य राज्य को शिक्षा और खेल के जरिए फिर से अग्रणी पंक्ति में खड़ा करना है।

देश के लिए सिंगल्स का त्याग महेश भूपति के साथ अपने संबंधों और सिंगल्स करियर पर बात करते हुए पेस ने कहा कि उन्होंने हमेशा तिरंगे को खुद से ऊपर रखा है। उन्होंने देश के लिए ग्रैंड स्लैम जीतने की खातिर अपने सिंगल्स करियर को पीछे छोड़ना उचित समझा। आज उनका बड़ा सपना भारत में ओलंपिक खेलों की मेजबानी कराना है, ताकि अपने खिलाड़ियों को घरेलू सरजमीं पर पोडियम पर खड़े होते देख सकें।

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