अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता: टीएमसी में बगावत के बाद सायोनी घोष का पुराना वीडियो वायरल
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बगावत की आग और सायोनी घोष का नाम तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में मची सियासी उठापटक के बीच 19 सांसदों द्वारा अलग गुट बनाने की मांग ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस बागी खेमे में सायोनी घोष का नाम और उनका हस्ताक्षर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। टीएमसी के भीतर महुआ मोइत्रा के साथ सायोनी घोष को सरकार पर तीखे हमले करने वाले चेहरों के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब पाला बदलने की खबरों ने उन्हें अपने ही पुराने बयानों के घेरे में ला खड़ा किया है।

वायरल वीडियो: क्या खुद पर ही लागू होता है बयान? सोशल मीडिया पर सायोनी घोष का एक पुराना चुनावी भाषण जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह बीजेपी पर निशाना साधते हुए कह रही हैं, चुनाव से पहले कहते हैं वादा करो, चुनाव के बाद क्या हुआ तेरा वादा? सब खत्म, ओके, टाटा, बाय-बाय, खल्लास। वीडियो में वह आगे कहती हैं, ये जुमलेबाजी नहीं चलेगी... अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता। अब लोग इसी बयान को लेकर सायोनी घोष पर तंज कस रहे हैं कि क्या यह खल्लास वाला मंत्र अब टीएमसी पर ही लागू हो गया है।

संसदीय दल में टूट और ममता की चुनौती काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 19 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अलग समूह की मांग की है। दावा किया जा रहा है कि 28 में से 20 सांसद ममता का साथ छोड़ चुके हैं। इस लिस्ट में सायोनी घोष के अलावा शताब्दी रॉय और यूसुफ पठान जैसे नाम भी शामिल हैं। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी के व्यवहार को लेकर ममता बनर्जी को दो-टूक कह दिया है—या तो अभिषेक को रखें या फिर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को।

राज्यसभा में भी खाली हो रहीं कुर्सियां केवल लोकसभा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा में भी टीएमसी के बिखरने का सिलसिला जारी है। टीएमसी के 13 में से 4 सांसदों—सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बड़ाईक और कोयल मलिक—ने इस्तीफा दे दिया है। ममता बनर्जी के पास फिलहाल केवल 8 सांसद ही मजबूती से खड़े दिख रहे हैं, जिनमें महुआ मोइत्रा, शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद प्रमुख हैं।

मोदी सरकार को मिलेगा बड़ा फायदा टीएमसी में हो रही यह बड़ी टूट केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए राहत की बात साबित हो सकती है। दोनों सदनों में टीएमसी सांसदों के अलग होने या इस्तीफा देने से एनडीए गठबंधन को संसद में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचने में काफी मदद मिलेगी। बंगाल की राजनीति में दीदी का किला अब एक बड़े संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है।

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