बंगाल में 4,000 EVM जलकर राख: चुनावी सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, साजिश की आशंका!
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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रशासनिक महकमे को हिलाकर रख दिया है। अलीपुर इलाके में स्थित एक सरकारी इमारत में लगी आग से विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई लगभग 4,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) पूरी तरह जलकर खाक हो गई हैं।

चुनावी सामग्री का जलना एक बड़ी विफलता

राज्य के दमकल एवं आपातकालीन सेवा मंत्री कौशिक चौधरी ने घटना की पुष्टि करते हुए इसे बेहद चिंताजनक बताया है। ये EVM इसी साल संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल की गई थीं और इन्हें 10 अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के मतों के डेटा के साथ कड़ी सुरक्षा में रखा गया था।

आग लगने का अजीब पैटर्न, मंत्री ने जताई साजिश की शंका

इस घटना को लेकर सबसे बड़ा रहस्य आग के फैलने का तरीका है। दमकल मंत्री के अनुसार, आग तीसरी मंजिल पर लगी थी, लेकिन बीच की मंजिलों को छोड़कर यह सीधे ऊपरी मंजिलों तक कैसे पहुंची, यह जांच का विषय है। मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आग जिस तरह से फैली और जिस स्तर का नुकसान हुआ, उसे देखकर किसी सोची-समझी साजिश या तोड़फोड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

क्या ममता बनर्जी की हार से है कोई कनेक्शन?

हालांकि इस अग्निकांड का सीधा संबंध पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हार से नहीं है, लेकिन इमारत का स्थान राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है। यह इलाका दक्षिण 24 परगना जिला परिषद का हिस्सा है, जिसे अभिषेक बनर्जी का गढ़ माना जाता है। महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड और हजारों EVM का एक साथ जल जाना अब बड़े राजनीतिक विमर्श का विषय बन गया है।

जांच में फॉरेंसिक टीम को आ रही बाधा

मामले की गंभीरता को देखते हुए FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि, घटना के कई घंटे बाद तक इमारत का तापमान इतना अधिक था कि फॉरेंसिक विशेषज्ञों को जली हुई मंजिलों तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या यह शॉर्ट सर्किट था या इसे जानबूझकर अंजाम दिया गया है।

सुरक्षा मानकों की होगी सघन जांच

अब सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों की बेशकीमती और संवेदनशील चुनावी मशीनें जिस इमारत में थीं, वहां फायर सेफ्टी सिस्टम क्यों नाकाम रहा? क्या वहां स्प्रिंकलर और अलार्म समय पर चालू हुए थे? कोलकाता पुलिस और दमकल विभाग अब इन सभी सुरक्षा मानकों की समीक्षा कर रहे हैं।

फिलहाल, प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है क्योंकि यह मामला केवल एक आगजनी का नहीं, बल्कि देश की चुनावी पवित्रता और सुरक्षा तंत्र से जुड़ा है। अब सबकी निगाहें ফরेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह महज एक दुर्घटना थी या लोकतंत्र को चुनौती देने वाली कोई गहरी साजिश।

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