खामोश! ममता बनर्जी के साथ चट्टान की तरह खड़े बिहारी बाबू , बगावत की अटकलों पर तोड़ी चुप्पी
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तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची हलचल और सांसदों के कथित बागी गुट को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, आसनसोल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपना रुख साफ कर दिया है। बिहारी बाबू ने उन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है जिनमें उनके बागी खेमे में शामिल होने का दावा किया जा रहा था।

अगर सच बोलना बगावत है, तो मैं भी बागी हूं

शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में कहा, स्वभाव से मैं हमेशा से स्पष्टवादी रहा हूं। मैं अक्सर कहता हूं कि अगर सच बोलना बगावत है, तो मैं भी बागी हूं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी बात हमेशा खुलकर रखते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे पार्टी के खिलाफ हैं।

मुश्किल वक्त में ममता दीदी ने दिया था साथ

सिन्हा ने ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी जताते हुए कहा, जब 2019 में चुनाव हारने के बाद मैं मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब बहुत कम लोग मेरे साथ थे। ममता बनर्जी उनमें से एक थीं जिन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया। अब जब पार्टी कठिन दौर से गुजर रही है, तो उन्हें अकेला छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता।

ममता दीदी के साथ खड़ा होना मेरा फर्ज

सांसद ने कहा कि आसनसोल की जनता का प्यार और ममता बनर्जी का समर्थन ही है कि वे दो बार टीएमसी के चुनाव चिह्न जोड़ा फूल पर जीतकर संसद पहुंचे हैं। उन्होंने कहा, मेरा सिद्धांत बहुत स्पष्ट है। जब ममता जी मेरे साथ खड़ी थीं, तो अब इस घड़ी में उनके साथ खड़े रहना मेरा नैतिक फर्ज और जिम्मेदारी है।

टीएमसी में बगावत: क्या है स्थिति?

टीएमसी के भीतर स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण बनी हुई है। पार्टी के 28 में से 19 लोकसभा सांसदों के एक अलग समूह बनाने की चर्चा है, जो दो-तिहाई बहुमत के करीब है। बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर मान्यता की मांग की है।

खबरों के अनुसार, काकोली घोष दस्तीदार को बागी गुट का नेता बताया जा रहा है, जबकि यूसुफ पठान और सायोनी घोष जैसे नाम भी चर्चा में हैं। वहीं, स्थिति को संभालने के लिए ममता बनर्जी खुद दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और सहयोगियों से मुलाकात कर रही हैं।

कौन हैं शत्रुघ्न सिन्हा?

15 जुलाई 1946 को पटना में जन्मे शत्रुघ्न सिन्हा ने एफटीआईआई से अभिनय का हुनर सीखा। 70 के दशक में हिंदी सिनेमा में अपनी धाक जमाने वाले सिन्हा ने 80 के दशक में राजनीति में कदम रखा। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे सिन्हा भाजपा छोड़कर कांग्रेस और फिर टीएमसी में शामिल हुए। फिलहाल वे पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

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