नेहरू-मोदी की तुलना पर छिड़ा सियासी संग्राम: भूपेश बघेल के हमले पर कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा का करारा पलटवार
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छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों नेहरू और मोदी के कार्यकाल को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने भाजपा और कांग्रेस के बीच नई जंग छेड़ दी है।

क्या है विवाद की जड़? पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से की। बघेल ने अपने पोस्ट में तर्क दिया कि 1947 से 1952 के बीच नेहरू का कार्यकाल पूरी तरह से वैध और निर्वाचित प्रक्रिया का परिणाम था। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि केवल कार्यकाल लंबा होने से किसी का कद नहीं बढ़ता। उन्होंने भाजपा नेताओं से सवाल किया कि क्या वे श्यामा प्रसाद मुखर्जी और सरदार पटेल जैसे नेताओं के योगदान को नकार रहे हैं।

कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा का तीखा प्रहार भूपेश बघेल के इस बयान पर छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने पलटवार किया है। वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक लोकप्रियता आज किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने कहा, मोदी का तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना उनकी कार्यक्षमता और देश की जनता के भरोसे का प्रमाण है। आज का दौर काम के आधार पर चुनाव जीतने का है।

कांग्रेस विलुप्त होने की कगार पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मंत्री वर्मा ने दावा किया कि पार्टी का जनाधार पूरी तरह से खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि जो पार्टी कभी पूरे देश में राज करती थी, वह आज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के मौजूदा प्रदर्शन केवल अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की नाकाम कोशिशें हैं।

बस्तर पर बड़ा दावा बस्तर के मुद्दे पर बात करते हुए मंत्री वर्मा ने कहा कि विष्णुदेव साय सरकार में क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। उन्होंने दावा किया कि बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्ति की ओर है। वर्मा के अनुसार, आने वाले समय में इतिहास इस बात को दर्ज करेगा कि भाजपा शासन के दौरान बस्तर मुख्यधारा के विकास से जुड़ा।

** खाद-बीज और सुरक्षा पर सफाई** प्रदेश के किसानों की चिंता पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि कहीं भी खाद और बीज की कोई कमी नहीं है, आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। वहीं, सोशल मीडिया पर नेताओं की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सामान्य प्रोटोकॉल के अलावा कोई अतिरिक्त सुरक्षा नहीं दी गई है।

यह विवाद अब भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक और राजनीतिक टकराव का बड़ा केंद्र बन चुका है, जहां एक ओर इतिहास के पन्नों को खंगाला जा रहा है, तो दूसरी ओर वर्तमान सरकार अपनी उपलब्धियों को गिनाने में जुटी है।

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