राज्यसभा चुनाव में चीरहरण का बवाल: कांग्रेस MLA के बिगड़े बोल, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर गरमाई MP की सियासत
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मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर उपजे नामांकन विवाद ने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होने के बाद सूबे की राजनीति में उबाल आ गया है। भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के बाहर जमकर हंगामा किया और इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया।

महाभारत से तुलना और अभद्र बयानों का दौर नामांकन रद्द होने के बाद विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल के बयान ने माहौल को और अधिक विवादास्पद बना दिया। उन्होंने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने की तुलना महाभारत में द्रौपदी के चीरहरण से कर डाली। यही नहीं, गुस्से में उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। जंडेल ने मंच से कहा कि वे कांग्रेस के लिए किसी भी हद तक जाने और कुर्बानी देने को तैयार हैं।

दिग्विजय सिंह बोले- यह सीट चोरी है पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को अवैधानिक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सुनियोजित तरीके से कांग्रेस की सीट चोरी करने की कोशिश की है। वहीं, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए इसे अंतिम लड़ाई बताया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि यदि वे लाठी खाने और संघर्ष करने के लिए तैयार नहीं हैं, तो राजनीति छोड़ दें।

सीएम मोहन यादव का पलटवार: कांग्रेस ने खुद रचा षड्यंत्र कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा खुलासा किया है। सीएम ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना कांग्रेस की अंदरूनी साजिश का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा, कांग्रेस के नेता चुनाव प्रक्रिया से भली-भांति परिचित हैं। जानबूझकर नामांकन पत्र में त्रुटियां छोड़ी गई हैं ताकि हार के डर से भागने का बहाना मिल सके। कांग्रेस अपने विधायकों में असुरक्षा की भावना से जूझ रही है और यह सब उसी ड्रामा का हिस्सा है।

कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी इस पूरे मामले ने अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर तूल पकड़ लिया है। भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग ने नियमों के तहत कार्रवाई की है, जबकि कांग्रेस इसे अपनी हार मानने को तैयार नहीं है। राज्य की राजधानी भोपाल से शुरू हुआ यह विवाद अब दिल्ली तक गूंजने लगा है। देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस के इस प्रदर्शन का चुनावी गणित पर क्या असर पड़ता है।

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