पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी (TMC) के भीतर मचे घमासान ने नया मोड़ ले लिया है। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने एक अलग गुट बनाकर एनडीए सरकार के समर्थन का एलान कर दिया है। इस बागी गुट ने वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार को अपना चीफ व्हिप नियुक्त किया है।
ममता मेरी नेता, पर विचारधारा अलग बागी सुरों के बीच काकोली घोष ने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें अपना मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा, ममता बनर्जी मेरी गुरु रही हैं। मैं उनके साथ पिछले 40 वर्षों से जुड़ी हूं, तब से जब वह सत्ता में नहीं थीं। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों ने हमें यह कड़ा फैसला लेने पर मजबूर किया है।
मेरा सिर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं खुद पर लग रहे गद्दार और मौकापरस्त जैसे आरोपों पर काकोली घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, मैंने बहुत सह लिया। मेरा सिर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं। मैं 2011 में ममता के सीएम बनने के बाद राजनीति में नहीं आई, बल्कि चार दशकों से संघर्ष कर रही हूं। ऐसे बयानों का मुझ पर कोई असर नहीं पड़ता।
टीएमसी से दूरी की असली वजह काकोली घोष ने पार्टी छोड़ने के पीछे गवर्नेंस और राज्य की खस्ताहाल स्थिति को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों में कामकाज पूरी तरह से पटरी से उतर गया है। राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और फिल्म जैसे उद्योग ध्वस्त हो चुके हैं, और कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
जनादेश का दिया हवाला बागी सांसदों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में कुप्रशासन, अराजकता और बेरोजगारी का बोलबाला है। काकोली ने कहा कि वह लंबे समय से इन मुद्दों को उठाती रही हैं और हालिया चुनावी जनादेश ने भी यह साबित कर दिया है कि जनता मौजूदा व्यवस्था से खुश नहीं है। इसी असंतोष के चलते उन्होंने स्वतंत्र रास्ता चुनने का फैसला किया है।
संसद में शक्ति प्रदर्शन उधर, टीएमसी नेतृत्व ने भी अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए कल्याण बनर्जी को लोकसभा में पार्टी का चीफ व्हिप नियुक्त किया है और स्पीकर को पत्र लिख दिया है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली के गलियारों में ममता बनर्जी की टीएमसी और काकोली घोष के नेतृत्व वाले बागी गुट के बीच यह व्हिप की जंग क्या नया राजनीतिक समीकरण पैदा करती है।
#WATCH | Delhi: Lok Sabha MP Kakoli Ghosh says, Mera sar katega lekin jhukega nahi... Maine bohot seh liya... I did not come here after Mamata Banerjee became Chief Minister in 2011; I have been fighting here for 40 years. And as I said, the words of such people have absolutely… pic.twitter.com/KKmfQlpUFl
— ANI (@ANI) June 9, 2026
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