ट्रंप की दोगली नीति : कुवैत में भारतीय की मौत पर अमेरिका का संयमी रुख, क्या यही है महाशक्ति का सच?
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वाशिंगटन: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बार फिर अमेरिका का दोहरा चेहरा सामने आया है। कुवैत में हुए ईरानी हमले में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हुए, लेकिन दुनिया को सुरक्षा का दम भरने वाला अमेरिका इस पर पूरी तरह मौन है।

ट्रंप की अमेरिकी जान वाली शर्त रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ तब तक पूर्ण युद्ध नहीं होगा, जब तक कि कोई अमेरिकी सैनिक नहीं मारा जाता। यह नीति साफ करती है कि अमेरिका के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का मतलब केवल अमेरिकी जान की सुरक्षा तक सीमित है। अन्य देशों के नागरिकों की मौत अमेरिका की युद्ध नीति के एजेंडे में गौण है।

कुवैत में तबाही की खौफनाक तस्वीर कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक भारतीय ने अपनी जान गंवाई और 63 से अधिक लोग घायल हुए। वहां तैनात भारतीय राजदूत प्रमीता त्रिपाठी ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और मृतक के पार्थिव शरीर को भारत भेजने की प्रक्रिया शुरू की। हमले के बाद कुवैत ने अपनी सभी हवाई सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दी हैं।

ईरान ने खींची रेड लाइन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे अमेरिका के खिलाफ एक कड़ा जवाब बताया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब अमेरिका को हिट एंड रन का मौका नहीं देंगे। अली अल सलेम एयर बेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले करके ईरान ने यह साबित कर दिया है कि वे अमेरिकी सैन्य ठिकानों को सीधे निशाना बनाने में सक्षम हैं।

असहज अमेरिका, ढुलमुल नीति ईरानी मिसाइलों द्वारा पहुंचाई गई तबाही ने अमेरिकी सैन्य अधिकारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ट्रंप फिलहाल रणनीतिक धैर्य का चोला ओढ़कर युद्ध से बचने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह चुप्पी उसकी कमजोरी को दर्शाती है।

दोहरे मापदंडों पर दुनिया में आक्रोश जब अमेरिकी हित प्रभावित होते हैं, तो अमेरिका पूरी दुनिया को युद्ध में झोंकने से नहीं हिचकिचाता। लेकिन जब किसी मित्र देश का एयरपोर्ट तबाह हो जाए या किसी अन्य देश का नागरिक मारा जाए, तो अमेरिका को अचानक शांति और कूटनीति याद आ जाती है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका की यही दोगली नीति वैश्विक स्तर पर उसके घटते भरोसे और नैतिकता के ह्रास का सबसे बड़ा कारण बन गई है।

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