दिल्ली अग्निकांड: मौत के तांडव के बीच मसीहा बने ये 18 रियल हीरोज , जिन्होंने बचाई कई जिंदगियां
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दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लरिश स्टे होटल में लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली, लेकिन इस त्रासदी के बीच इंसानियत की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली जिसने मौत के आंकड़ों को और बढ़ने से रोक लिया। जब चारों तरफ धुआं और चीख-पुकार थी, तब कुछ जांबाज मसीहा बनकर सामने आए।

गद्दों का बना सुरक्षा कवच आग की लपटों को देख जब लोग ऊपरी मंजिलों से मदद की गुहार लगा रहे थे, तब पास में ही गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान ने फुर्ती दिखाई। उन्होंने अपनी दुकान से दर्जनों गद्दे और रजाइयां निकालकर होटल के बाहर बिछा दीं। यह एक अस्थायी सुरक्षा कवच बना, जिस पर कूदकर कई लोगों ने अपनी जान बचाई।

इंसानियत मजहब से ऊपर इस बचाव कार्य में अरमान को चोटें आईं और उनकी दुकान का करीब दो लाख रुपये का सामान भी जल गया। लेकिन रियाजुद्दीन के लिए यह नुकसान कोई मायने नहीं रखता। वे कहते हैं, हिंदू-मुसलमान से ऊपर इंसानियत होती है। हम सब हिंदुस्तानी हैं और जरूरतमंदों की मदद करना हमारा फर्ज है।

धुएं के बीच मौत को मात मोहम्मद अफजल, असरार खान और वकार जैसे युवाओं ने अपनी जान की परवाह न करते हुए होटल के भीतर प्रवेश किया। अंदर का मंजर भयावह था—सीढ़ियां गर्म थीं और धुएं के कारण सांस लेना मुश्किल था। इन युवाओं ने मुंह पर कपड़े बांधकर लोगों को कंधों पर उठाया और बाहर सुरक्षित निकाला। जो विदेशी नागरिक भाषा नहीं समझ पा रहे थे, उन्हें इशारों में रास्ता समझाकर बाहर निकाला गया।

CPR से लौटाईं सांसें हादसे के दौरान मोहम्मद शोएब खान और एंबुलेंस ट्रेनिंग ले चुके वसीम राजा ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। जब कई लोग बेहोश मिले, तो उन्होंने तुरंत CPR देकर उनकी रुकती हुई सांसों में जान फूंकी। उन्होंने घायलों को न केवल बाहर निकाला बल्कि उन्हें एंबुलेंस तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाई। तौसीफ खान और मो. हनीश जैसे स्थानीय लोगों ने बाथरूम और खिड़कियों के जरिए अंदर घुसकर लोगों को बाहर निकाला।

वर्दी का फर्ज: दिल्ली पुलिस के 10 जांबाज इस रेस्क्यू अभियान में दिल्ली पुलिस के 10 जवानों ने भी असाधारण साहस दिखाया। आग की लपटों में झुलसने के बावजूद हेड कॉन्स्टेबल करतार, हरज्ञान, प्रेम चंद, जितेंद्र, दिनेश और कॉन्स्टेबल रविरंजन, संदीप, विक्रम, दीपक व रामपाल ने अपना बचाव कार्य नहीं छोड़ा। ये सभी पुलिसकर्मी घायलों को बचाते हुए खुद भी जख्मी हो गए।

आज पूरा देश इन 18 रियल हीरोज की बहादुरी को सलाम कर रहा है। यदि ये लोग उस दिन समय पर न पहुंचते, तो इस दुखद हादसे में मरने वालों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी।

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