दाऊद इब्राहिम की धमकी और बेटे का अपहरण: ललित मोदी ने भारत न लौटने की बताई चौंकाने वाली वजह
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आईपीएल के संस्थापक और पूर्व कमिश्नर ललित मोदी पिछले 17 सालों से भारत से बाहर हैं। भगोड़े के आरोपों का सामना कर रहे मोदी ने अब चुप्पी तोड़ते हुए उन गंभीर परिस्थितियों का खुलासा किया है, जिसके कारण उन्होंने देश छोड़ा। उन्होंने दावा किया कि वे कोई अपराधी नहीं, बल्कि अंडरवर्ल्ड के निशाने पर थे।

मैच फिक्सिंग के खिलाफ सख्ती बनी दुश्मनी की वजह ललित मोदी का आरोप है कि आईपीएल की शुरुआत में सट्टेबाजी और मैच फिक्सिंग के खिलाफ उनके सख्त रवैये ने दाऊद इब्राहिम के सट्टा बाजार की कमर तोड़ दी थी। इसी के चलते दाऊद और छोटा शकील उनके दुश्मन बन गए। मोदी ने बताया कि उन पर तीन बार जानलेवा हमले की कोशिश की गई, लेकिन वे बाल-बाल बच गए।

दाऊद की धमकी: सब माफ कर देंगे, एक आईपीएल टीम दिलवाओ मोदी ने एक हैरान करने वाला किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि एक बार एक बिचौलिए ने उन्हें सैटेलाइट फोन के जरिए दाऊद इब्राहिम से कनेक्ट किया। दाऊद ने उन्हें फोन पर धमकाते हुए कहा कि सब माफ कर देंगे, बस मुझे एक आईपीएल टीम दिलवाओ । मोदी ने जवाब दिया कि अब उनका आईपीएल से कोई सरोकार नहीं है, जिसके बाद फोन काट दिया गया।

बेटे के अपहरण का सनसनीखेज दावा ललित मोदी ने बताया कि धमकियों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। उन्होंने दावा किया कि लंदन की स्लोन स्ट्रीट से उनके बेटे का अपहरण कर लिया गया था, जिसे बाबा अविन नाम के व्यक्ति ने अंजाम दिया था। इसके अलावा, जोहान्सबर्ग में भी उन पर हमले की साजिश रची गई थी। मोदी के अनुसार, ये सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने आईपीएल को भारत से बाहर दक्षिण अफ्रीका शिफ्ट कर दिया था, जिससे सट्टेबाजों का करोड़ों का नुकसान हुआ था।

मैं भगोड़ा नहीं, राजनीतिक साजिश का शिकार ललित मोदी ने खुद को भगोड़ा मानने से इनकार किया है। उन्होंने दोहराया कि उन पर लगे आरोपों के पीछे राजनीतिक प्रतिशोध है। मोदी के अनुसार, 2010 में शुरू हुई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच और बीसीसीआई के साथ विवाद पूरी तरह से उनकी छवि खराब करने की एक सुनियोजित कोशिश थी।

क्रिकेट जगत में क्रांति और विवाद 2008 में आईपीएल की शुरुआत कर ललित मोदी ने क्रिकेट जगत में नई क्रांति ला दी थी। देखते ही देखते यह टूर्नामेंट दुनिया की सबसे मूल्यवान लीग बन गया। हालांकि, इस चमक-धमक के साथ ही वित्तीय अनियमितताओं और फेमा (FEMA) जैसे विवाद भी उनके साथ जुड़ गए, जिसके बाद वे लंदन शिफ्ट हो गए। मोदी का कहना है कि वे आज भी उसी डर के साये में जीने को मजबूर हैं, जिसे उन्होंने शुरू किया था।

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