सीजफायर की नई परिभाषा: ट्रंप का ईरान को कड़ा संदेश, कहा- सैनिकों की मौत पर बदलेंगे तेवर
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक ऐसे नाजुक मुकाम पर है, जहां कूटनीति और सैन्य टकराव साथ-साथ चल रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्षविराम (सीजफायर) को लेकर एक ऐसी परिभाषा दी है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।

सीजफायर का मतलब कम गोलीबारी ?

ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने सीजफायर को परिभाषित करते हुए कहा, दुनिया के उस हिस्से में सीजफायर का अर्थ यह हो सकता है कि दोनों पक्ष पहले की तुलना में कम तीव्रता से गोलीबारी कर रहे हों। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब खाड़ी क्षेत्र में दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई जारी है।

सैनिकों की मौत पर लाल रेखा

ट्रंप ने साफ शब्दों में अपने अधिकारियों को संदेश दिया है कि ईरान के साथ जारी संघर्षविराम की एक सीमा है। सूत्रों के अनुसार, यदि किसी हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत होती है और उसमें ईरान की भूमिका साबित होती है, तो अमेरिका अपनी रणनीति फौरन बदल देगा। ट्रंप का मानना है कि छोटे स्तर की झड़पें फिलहाल सहन की जा सकती हैं, लेकिन सैनिकों की जान एक रेड लाइन है।

कुवैत हमले से बढ़ा तनाव

ताजा तनाव तब और गहरा गया जब ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने कुवैत और बहरीन के ठिकानों को निशाना बनाया। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए गंभीर हमले में एक भारतीय नागरिक की दुखद मौत हो गई और 63 से अधिक लोग घायल हो गए। ट्रंप ने हालांकि इन हमलों को ईरान की जवाबी प्रतिक्रिया बताते हुए इनका महत्व कम करने की कोशिश की, मगर स्थिति पर नजर बनाए रखने के संकेत दिए।

वार्ता अभी भी जारी

इन सबके बीच, ट्रंप ने उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पूरी तरह बंद हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच संपर्क के रास्ते खुले हैं और कूटनीतिक वार्ता बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा

पूरे संकट के केंद्र में होर्मुज स्ट्रेट है, जो दुनिया के तेल व्यापार का प्रमुख मार्ग है। अमेरिका इस मार्ग को निर्बाध रखना चाहता है, जबकि ईरान इसे राजनीतिक समझौते और सुरक्षा से जोड़कर टोल व्यवस्था लागू करने की जिद पर अड़ा है। साथ ही, परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन जैसे मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच गतिरोध बरकरार है।

फिलहाल, ट्रंप का बयान यह साफ करता है कि अमेरिका फिलहाल पूर्ण युद्ध के बजाय नियंत्रित तनाव की नीति पर चल रहा है, लेकिन भविष्य में कोई भी बड़ी चूक स्थिति को विस्फोटक बना सकती है।

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