मालवीय नगर अग्निकांड: 26 घंटे बाद पहुंचीं सीएम, विपक्ष ने पूछा- क्या ऐसी ही बरती जाएगी लापरवाही?
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दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरी राजधानी को झकझोर कर रख दिया है। हादसे के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल उन नेताओं पर उठ रहा है जो घटना के 26 घंटे बाद भी पीड़ितों से मिलने नहीं पहुंचे।

26 घंटे की देरी पर सियासत घटना के करीब 26 घंटे बीत जाने के बाद आज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अस्पताल पहुंचीं और पीड़ितों का हाल जाना। मुख्यमंत्री के घटनास्थल पर न पहुंचने को लेकर कांग्रेस नेता देवेंद्र यादव ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे असंवेदनशील रवैया करार दिया है। वहीं, उप मुख्यमंत्री प्रवेश वर्मा ने भी अभी तक घटनास्थल का दौरा नहीं किया है।

AAP के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी? हैरानी की बात यह है कि आम आदमी पार्टी (AAP) का कोई भी बड़ा चेहरा अभी तक घटनास्थल पर दिखाई नहीं दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, आतिशी मार्लेना और सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर दुख तो जताया है, लेकिन धरातल पर उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हुई है। मेयर प्रवेश वाही ने हालांकि होटल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं, लेकिन उनके दौरे की भी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।

किसने लिया सुध? इस त्रासदी के समय कुछ नेताओं ने मौके पर पहुंचकर जिम्मेदारी दिखाई। गृह मंत्री आशीष सूद ने घटनास्थल का दौरा कर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। वहीं, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने मौके पर पहुंचकर सरकार और संबंधित एजेंसियों की मिलीभगत पर गंभीर सवाल उठाए। इसके अलावा, भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने भी घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।

जांच के घेरे में प्रशासन घटनास्थल पर पहुंचे गृह मंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट किया कि मामले को किसी भी हाल में हल्के में नहीं लिया जाएगा। फिलहाल प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि क्या इमारत के पास फायर एनओसी (NOC) थी और क्या उसे होटल के रूप में चलाने की वैध अनुमति प्राप्त थी।

जनता का आक्रोश भले ही किसी नेता का घटनास्थल पर जाना कानूनी बाध्यता न हो, लेकिन ऐसी भीषण त्रासदी के समय नेताओं की अनुपस्थिति जनता के बीच एक नकारात्मक संदेश दे रही है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और सरकार समय रहते सक्रिय होते, तो शायद 21 जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। अब देखना यह है कि इस मामले में दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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