भारतीय शेयर बाजार इन दिनों एक कठिन दौर से गुजर रहा है। विदेशी निवेशकों (FII/FPI) की रिकॉर्ड बिकवाली और निफ्टी में हालिया गिरावट ने बाजार की चमक फीकी कर दी है। निवेशकों के पलायन की सबसे बड़ी वजहों में टैक्स का भारी बोझ प्रमुखता से उभर कर सामने आया है। आइए जानते हैं कि वैश्विक स्तर पर भारत का टैक्स ढांचा कहाँ खड़ा है।
आंकड़े बताते हैं कि 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से रिकॉर्ड 2.6 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। विश्लेषकों का मानना है कि केवल जियोपॉलिटिकल तनाव या महंगाई ही इसकी वजह नहीं है, बल्कि भारत का जटिल और महंगा टैक्स स्ट्रक्चर निवेशकों के लिए एंट्री और एग्जिट बैरियर बन गया है। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को सहारा जरूर दिया है, लेकिन विदेशी पूंजी की निकासी चिंता का बड़ा विषय बनी हुई है।
भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने पर एक निवेशक को 7 अलग-अलग तरह के शुल्क और टैक्स चुकाने पड़ते हैं। इसमें ब्रोकरेज के अलावा STT (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स), स्टाम्प ड्यूटी, सेबी शुल्क, एक्सचेंज चार्ज और GST शामिल हैं।
खास बात यह है कि ये शुल्क इस बात की परवाह किए बिना कटते हैं कि आपको मुनाफा हुआ है या नुकसान। इसके ऊपर से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर 20% और लॉन्ग टर्म (LTCG) पर 12.5% का टैक्स निवेशकों के मुनाफे को सीधा प्रभावित करता है।
दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजार, अमेरिका की तुलना करें तो भारत कहीं ज्यादा महंगा साबित होता है। अमेरिकी बाजार में ज्यादातर ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म कमीशन-फ्री (0% ब्रोकरेज) सुविधा देते हैं। वहां कोई STT नहीं लगता, केवल नाममात्र की नियामक फीस ली जाती है। इसके विपरीत, भारत में प्रवेश करते ही निवेशक को कई स्तरों पर करों का भुगतान करना पड़ता है।
अगर हम दुनिया के प्रमुख बाजारों का आकलन करें, तो सिंगापुर, हांगकांग और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) निवेशकों के लिए स्वर्ग माने जाते हैं, क्योंकि वहां कैपिटल गेन टैक्स शून्य है।
| देश | LTCG टैक्स | STCG टैक्स | ट्रांजेक्शन टैक्स | | :--- | :--- | :--- | :--- | | सिंगापुर/हांगकांग | 0% | 0% | नहीं | | अमेरिका | 0% - 20% | आयकर स्लैब अनुसार | नहीं | | चीन | 0% | 0% | स्टांप ड्यूटी लागू | | भारत | 12.5% | 20% | STT लागू |
RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक इन्फोग्राफ साझा करते हुए नीति निर्माताओं को चेताया है। उनका कहना है कि टैक्स से सरकार को राजस्व तो मिलता है, लेकिन निवेश से ही देश की असली दौलत बनती है।
तमाम रिपोर्ट इस बात पर सहमत हैं कि यदि भारत को विदेशी निवेशकों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी और आकर्षक बनना है, तो उसे अपने टैक्स ढांचे पर पुनर्विचार करना होगा। बढ़ते शुल्क न केवल निवेशकों के उत्साह को कम कर रहे हैं, बल्कि भारतीय कंपनियों की पूंजी जुटाने की क्षमता को भी प्रभावित कर रहे हैं।
🚨 US attracts investors with lower taxes.
— TradeX (@TradeX_07) June 3, 2026
India punishes investors with higher taxes. 👀
🇮🇳 INDIA
• STCG Tax → 20%
• LTCG Tax → 12.5%
• STT charged on every trade
• Extra charges & brokerage
🇺🇸 United States
• 0% brokerage with modern platforms
• Lower transaction and… pic.twitter.com/OP4YARO4l6
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