हिंद महासागर में हलचल: पाक के चीनी सबमरीन को जवाब देने के लिए भारत ने तैनात किया INS Airavat
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हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) अब केवल व्यापारिक मार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक शक्तियों के बीच रणनीतिक बिसात बन चुका है। हाल ही में पाकिस्तान ने अपने तीन नौसैनिक जहाजों को श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह पर भेजकर भारत की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।

पाकिस्तान की सद्भावना या चीन का शक्ति प्रदर्शन?

आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान ने इसे सद्भावना यात्रा और लॉजिस्टिक सपोर्ट करार दिया है। लेकिन इसके पीछे की हकीकत अलग है। पाकिस्तान ने जो बेड़ा भेजा है, उसमें तीन मुख्य जहाज शामिल हैं:

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिशन का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना और चीन-पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य साझेदारी को प्रदर्शित करना है।

Hangor सबमरीन पर क्यों है सुरक्षा एजेंसियों की नजर?

इस पूरे काफिले में Hangor श्रेणी की सबमरीन सबसे चिंताजनक है। यह चीन के सहयोग से तैयार की गई है और पाकिस्तान की अंडरवाटर सैन्य क्षमता का नया अध्याय है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कोलंबो में इसकी मौजूदगी का मतलब सिर्फ पोर्ट विजिट नहीं, बल्कि समुद्री क्षेत्र में जासूसी और सामरिक डेटा जुटाना भी हो सकता है।

भारत का तत्काल जवाब: INS Airavat की तैनाती

पाकिस्तान की इस हरकत के बाद भारत ने बिना समय गंवाए अपनी प्रतिक्रिया दी। 1 जून 2026 को भारतीय नौसेना ने अपने शक्तिशाली वॉरशिप INS Airavat को कोलंबो बंदरगाह पर तैनात कर दिया।

यह तैनाती केवल एक सामान्य गश्त नहीं, बल्कि एक कड़ा संदेश है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने समुद्री पड़ोस में होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए है और अपनी परिचालन तैयारियों में कोई कोताही नहीं बरतेगा।

श्रीलंका के लिए बढ़ती कूटनीतिक चुनौती

कोलंबो बंदरगाह पर एक साथ पाकिस्तान और भारत के युद्धपोतों की मौजूदगी श्रीलंका के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन गई है। श्रीलंका जहाँ भारत के साथ सुरक्षा और आर्थिक संबंध मजबूत रखना चाहता है, वहीं पाकिस्तान और चीन के साथ भी संतुलन बनाना उसके लिए जरूरी है।

क्या भारत की चिंताएं जायज हैं?

भारत लंबे समय से चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स (String of Pearls) नीति के खिलाफ सजग रहा है। जब चीन निर्मित सबमरीन भारतीय समुद्री सीमा के इतने करीब आती है, तो इसे महज एक नौसैनिक दौरा नहीं माना जा सकता। भारत की त्वरित कार्रवाई यह दर्शाती है कि नई दिल्ली हिंद महासागर में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को लेकर कतई ढिलाई नहीं बरतेगी।

यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में हिंद महासागर में सैन्य प्रतिस्पर्धा और अधिक तीव्र हो सकती है।

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