श्रीकांत शिंदे का बड़ा दांव: भाजपा और ठाकरे गुट को लगा तगड़ा झटका, सैकड़ों समर्थकों ने थामा शिवसेना का दामन
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गृह जिले ठाणे में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। कल्याण से सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे की मौजूदगी में हुए एक बड़े फेरबदल ने न केवल विपक्षी दल उद्धव ठाकरे गुट (UBT) को हिला दिया है, बल्कि सहयोगी दल भाजपा को भी गहरा झटका दिया है।

भाजपा के दो मजबूत स्तंभ हुए शिंदेमय कल्याण-डोंबिवली बेल्ट में भाजपा के लिए यह घटना किसी बड़े झटके से कम नहीं है। पार्टी के पुराने और कद्दावर नेता चौधरी और धात्रक परिवारों ने भाजपा का साथ छोड़कर शिवसेना का दामन थाम लिया है। स्थानीय राजनीति में इन परिवारों की पकड़ बेहद मजबूत है और दशकों से ये नगर निगम की राजनीति को प्रभावित करते आए हैं। इनका जाना भाजपा के स्थानीय संगठन के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

प्रशासनिक अनुभव का मिला साथ बुधवार को हुए इस कार्यक्रम में राजनीतिक दिग्गजों के साथ-साथ प्रशासनिक विशेषज्ञ भी शामिल हुए। केडीएमसी (KDMC) की सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त हेमा मुंबरकर ने अपने समर्थकों के साथ शिवसेना की सदस्यता ली। सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने उनके 38 वर्षों के प्रशासनिक अनुभव की सराहना की और कहा कि यह अनुभव पार्टी की विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने में बेहद सहायक साबित होगा।

उद्धव गुट के युवा नेटवर्क में सेंध इस राजनीतिक उठापटक में ठाकरे गुट को सबसे बड़ा नुकसान कल्याण, डोंबिवली और अंबरनाथ क्षेत्रों में हुआ है। युवा सेना के नेता योगेंद्र भोईर और ट्विंकल भोईर के नेतृत्व में 200 से अधिक पदाधिकारियों ने ठाकरे गुट को अलविदा कह दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में युवा पदाधिकारियों का जाना आगामी चुनावों में ठाकरे गुट के जमीनी नेटवर्क को छिन्न-भिन्न कर सकता है।

विकास पर भरोसा, यही जीत का आधार इस घटनाक्रम पर सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कुशल नेतृत्व और राज्य सरकार की जनहितैषी योजनाओं से प्रभावित होकर ही नेता और कार्यकर्ता पार्टी से जुड़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवसेना वर्तमान में नई ऊर्जा के साथ काम कर रही है और इन नए सदस्यों के आने से ठाणे और कल्याण क्षेत्र में पार्टी का वर्चस्व और अधिक मजबूत होगा।

भविष्य की राजनीति एक तरफ जहां शिवसेना (शिंदे गुट) अपनी ताकत बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ सहयोगी दलों के भीतर बढ़ती यह नाराजगी आने वाले समय में महायुति के भीतर नए संघर्षों को जन्म दे सकती है। फिलहाल, यह साफ है कि कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र में एकनाथ शिंदे का पलड़ा काफी भारी नजर आ रहा है।

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