इंदौर नगर निगम घोटाला: 93 करोड़ के फर्जीवाड़े में ईडी ने तीन दिग्गजों को दबोचा
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इंदौर नगर निगम (IMC) में हुए करोड़ों के फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो इस पूरे घोटाले के मुख्य सूत्रधार माने जा रहे हैं।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी? ईडी की इंदौर सब-जोनल टीम ने 1 जून 2026 को तीन लोगों को पीएमएलए (PMLA) के तहत हिरासत में लिया। इनमें पूर्व सहायक अभियंता अभय सिंह राठौर, ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा शामिल हैं। विशेष पीएमएलए अदालत ने इन तीनों को 5 जून 2026 तक रिमांड पर भेज दिया है।

क्या है पूरा मामला? यह मामला नगर निगम के खजाने से फर्जी बिलों, जाली वर्क ऑर्डर और नकली दस्तावेजों के जरिए धन निकासी से जुड़ा है। ईडी ने मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि उन विकास कार्यों के बिल लगाए गए, जो जमीन पर कभी हुए ही नहीं थे।

119 करोड़ के बिल और 93 करोड़ की चपत ईडी की जांच के अनुसार, साल 2018 से 2023 के बीच लगभग 119.53 करोड़ रुपये के फर्जी बिल पेश किए गए। इनमें से 86.54 करोड़ का भुगतान निगम ने कर दिया। वहीं, 2018 से पहले भी करीब 6.22 करोड़ का गबन किया गया था। कुल मिलाकर यह घोटाला 92.76 करोड़ रुपये से अधिक का है।

अफसर और ठेकेदारों की मिलीभगत पूर्व सहायक अभियंता अभय सिंह राठौर पर आरोप है कि उसने फर्जी वर्क ऑर्डर तैयार करने और उन्हें मंजूरी दिलाने में अहम भूमिका निभाई। वहीं, ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा की फर्मों को नियमों को ताक पर रखकर 71.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इन दोनों ने न केवल फर्जी बिल जमा किए, बल्कि अवैध धन को अन्य लाभार्थियों तक पहुंचाने का काम भी किया।

पहले भी हुई थी करोड़ों की जब्ती इससे पहले ईडी ने इस मामले में छापेमारी कर 22.04 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की थी। जुलाई 2025 में, एजेंसी ने घोटाले की कमाई से खरीदी गई 34 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को भी कुर्क किया था।

जांच का दायरा और बढ़ने की उम्मीद फिलहाल ईडी घोटाले की मनी ट्रेल (पैसे की आवक-जावक) की गहराई से जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि यह काला धन और कहां निवेश किया गया। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ अन्य अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है, जिससे इंदौर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर लगे दाग और गहरे हो गए हैं।

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