आरफा-निवेदिता पर भड़के लोग: लव जिहाद को खूबसूरती बताने वाली ये कैसी कैसी चुगली ?
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नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर एक वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी और जेएनयू की प्रोफेसर निवेदिता मेनन के बीच हुई बातचीत पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस वायरल क्लिप में दोनों लव जिहाद जैसे संवेदनशील मुद्दे का उपहास उड़ाती और हिंदू समाज पर कटाक्ष करती नजर आ रही हैं।

हैंडसम होने का विवादित तर्क बातचीत के दौरान आरफा खानुम ने सवाल किया कि लड़कियों को मुस्लिम लड़के ही क्यों पसंद आते हैं? इस पर निवेदिता मेनन ने तंज कसते हुए कहा, क्या मुस्लिम मर्द इतने आकर्षक और हैंडसम होते हैं? हो सकता है। इसके बाद दोनों ने इस मुद्दे को हिंदू राष्ट्र के डर और हिंदू समाज की असफलता से जोड़कर पेश किया।

लव जिहाद को बेबसी का नाम देना निवेदिता ने लव जिहाद के आरोपों को खारिज करते हुए इसे हिंदू पुरुषों की बेबसी और कुंठा बताया। उन्होंने तर्क दिया कि यह हिंदू समाज की पितृसत्तात्मक सोच है, जो अपनी महिलाओं की पसंद पर नियंत्रण रखना चाहती है। उनके अनुसार, यह सिर्फ नफरत का एक नैरेटिव है।

हकीकत बनाम प्रोपेगेंडा आलोचकों का कहना है कि ये दोनों शख्सियतें जमीन पर हो रही आपराधिक घटनाओं—जैसे धर्मांतरण के मामलों और संगठित गिरोहों की करतूतों—को नजरअंदाज कर रही हैं। लव जिहाद के कई मामलों में आरोपी अक्सर अपनी पहचान छिपाकर, जैसे माथे पर टीका लगाकर या हाथ में कलावा बांधकर हिंदू लड़कियों को जाल में फंसाते हैं। इस सच्चाई को पूरी तरह दरकिनार कर इसे केवल आकर्षण का नाम देना उनकी मानसिकता पर सवाल उठाता है।

कौन हैं ये सहेलियां ? आरफा खानुम शेरवानी, जो खुद को प्रगतिशील पत्रकार बताती हैं, पर अक्सर एकतरफा एजेंडा चलाने का आरोप लगता है। वहीं, निवेदिता मेनन का इतिहास भी विवादों से भरा रहा है। भारतीय सेना पर सवाल उठाने से लेकर कश्मीर को लेकर विवादित बयान देने और जेएनयू में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के समर्थन तक, उनके नाम कई विवाद दर्ज हैं।

निष्कर्ष: भावनाओं से खिलवाड़ का खेल यह पूरी बातचीत महज एक बौद्धिक चर्चा नहीं, बल्कि हिंदू समाज को नीचा दिखाने की एक सोची-समझी कोशिश लग रही है। समाज का एक बड़ा वर्ग यह पूछ रहा है कि क्या एक व्यवस्थित तरीके से किए जाने वाले धर्मांतरण को हैंडसमनेस और फेमिनिज्म का जामा पहनाकर छिपाना जायज है? हकीकत यह है कि यह खूबसूरती का नहीं, बल्कि मक्कारी और भावनाओं के शोषण का एक गहरा जाल है।

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