भारत में सरकारी नौकरी को सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इसके लिए युवा अपनी जवानी के महत्वपूर्ण साल झोंक देते हैं। लेकिन केरल से सामने आया एक मामला सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठा रहा है। यहाँ एक व्यक्ति को नौकरी का नियुक्ति पत्र तब मिला, जब वह रिटायरमेंट की दहलीज पर खड़ा है।
2005 में देखी थी नौकरी की राह यह मामला मलप्पुरम जिले के अब्दुल मजीद का है। मजीद ने साल 2005 में पार्ट-टाइम जूनियर अरबी शिक्षक के पद के लिए परीक्षा दी थी। मेहनत रंग लाई और उनका नाम सिलेक्ट लिस्ट में भी आ गया। उन्होंने उम्मीद की थी कि जल्द ही उन्हें नियुक्ति मिलेगी, लेकिन वक्त निकलता गया और उनकी उम्मीदें दम तोड़ गईं।
2008 में ही खत्म हो गई थी लिस्ट की उम्र नियमानुसार, जिस रैंक लिस्ट में मजीद का नाम था, उसकी वैधता 2008 में ही समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद पद खाली पड़ा रहा और भर्ती नहीं हो सकी। अब सालों बाद केरल लोक सेवा आयोग (PSC) ने अचानक से उस पद के लिए मजीद को एडवाइस मेमो (नियुक्ति पत्र) भेज दिया।
61 साल की उम्र में मिला बेकार तोहफा आज अब्दुल मजीद की उम्र 61 साल हो चुकी है। जिस उम्र में लोग सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होते हैं, उस समय उन्हें नौकरी का पत्र मिला है। सरकारी नियमों के अनुसार, उम्र सीमा पार हो जाने के कारण अब वे इस नौकरी को ज्वाइन करने की स्थिति में ही नहीं हैं। उनका सपना, जो कभी हकीकत बन सकता था, अब केवल एक कागजी औपचारिकता बनकर रह गया है।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा यह खबर सामने आते ही इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। लोग इसे सरकारी सिस्टम की घोर लापरवाही बता रहे हैं। एक यूजर ने तंज कसते हुए कहा, जवानी में आवेदन और बुढ़ापे में तैनाती, ये सरकारी तंत्र का अजब-गजब खेल है। वहीं, कई लोग इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दे रहे हैं।
सिस्टम की देरी या प्रशासनिक भूल? सवाल यह उठता है कि जिस पद की सूची 2008 में ही खत्म हो गई थी, वहां 18 साल बाद नियुक्ति की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई? रिपोर्ट्स के अनुसार, जब पद को भरने के लिए कोई नया उम्मीदवार नहीं मिला, तो पुराने रिकॉर्ड्स खंगाले गए। इस दौरान मजीद का नाम सामने आया और बिना यह सोचे कि उम्मीदवार अब किस उम्र का होगा, पत्र जारी कर दिया गया।
यह घटना दर्शाती है कि कैसे फाइलों की धूल में दबे फैसले किसी व्यक्ति के जीवन का बड़ा हिस्सा बर्बाद कर सकते हैं। मजीद का मामला सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता की सख्त जरूरत को बयां करता है।
🚨 A Kerala man applied for a government job in 2005 and has received an appointment letter as a part-time junior Arabic teacher in 2026. 20 years later. 🙏 pic.twitter.com/fgaDLCuS8r
— Indian Tech & Infra (@IndianTechGuide) May 31, 2026
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