अमेरिका के लिए बदल गया खेल: ईरान ने फिर खड़ी की अपनी सैन्य ताकत, अब जवाबी हमले की तैयारी
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर है। फरवरी में हुए अचानक सैन्य हमलों में ईरान को भारी नुकसान झेलना पड़ा था, जिसमें उसके सैन्य अड्डों का विनाश और नेतृत्व स्तर पर बड़ा नुकसान शामिल था। लेकिन अब खबरें कुछ और ही बयां कर रही हैं। ईरान न केवल संभल चुका है, बल्कि उसने अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से बहाल कर लिया है।

1,000 मिसाइलें और 50 गुप्त लॉन्चर: ईरान की नई ताकत युद्ध के दौरान ईरान को अपनी 70 प्रतिशत मिसाइल शक्ति गंवाने का दावा किया गया था, लेकिन खुफिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान ने स्थिति को पूरी तरह पलट दिया है। वर्तमान में ईरान के पास 2,100 से अधिक मिसाइलें और 50 गुप्त मिसाइल लॉन्चर फिर से सक्रिय हो चुके हैं। ये वही लॉन्चर हैं जिन्हें अमेरिका ने नष्ट करने का दावा किया था। इसके अलावा, हजारों शाहेद ड्रोन ईरान के तरकश में मौजूद हैं, जो खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।

चीन और रूस का ‘बैकडोर’ सपोर्ट ईरान की इस तेजी से रिकवरी के पीछे चीन और रूस का हाथ होने की बात कही जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन की कंपनियों ने ईरान को हथियारों के पुर्जे और तकनीकी मदद दी है, जिससे ईरान ने सस्ते रॉकेट और मिसाइलों का बड़ा जखीरा तैयार कर लिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों के विपरीत, चीन ने ईरान को हथियार न देने पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे ईरान का हौसला और बुलंद हुआ है।

नावेल नाकेबंदी को चुनौती: सिल्क रोड का इस्तेमाल सैन्य मोर्चे के साथ-साथ ईरान ने आर्थिक मोर्चे पर भी घेराबंदी तोड़ दी है। नवीनतम जानकारी के अनुसार, ईरान अब रेलवे के माध्यम से चीन और पाकिस्तान को एलएनजी (LNG) और तेल की आपूर्ति कर रहा है। यह सिल्क रोड रेलवे नेटवर्क अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को दरकिनार करने का ईरान का एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

शांति वार्ता: क्या निकलेगा कोई ठोस हल? कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है। हालांकि, ईरान ने कुछ बिंदुओं पर सहमति के संकेत दिए हैं, जैसे:

ईरान की मांगें: क्या झुकेंगे ट्रंप? ईरान की स्पष्ट शर्तें हैं: अमेरिका अपने आर्थिक प्रतिबंधों को हटाए और विदेशी बैंकों में जमी हुई ईरानी संपत्तियों को तुरंत मुक्त करे। साथ ही, क्षेत्रीय संघर्षों, विशेषकर लेबनान और गाजा के मुद्दों पर अमेरिका को अपना रवैया बदलना होगा।

फिलहाल गेंद अमेरिका के पाले में है। अगर कोई अंतिम समझौता नहीं होता, तो ईरान की यह बढ़ती सैन्य ताकत मध्य पूर्व में एक बड़े और अप्रत्याशित युद्ध का कारण बन सकती है।

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