JEE Advanced 2026: 15 घंटे की पढ़ाई नहीं, कूल माइंडसेट से कबीर छिल्लर ने गाड़े सफलता के झंडे
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इंजीनियरिंग की दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक, JEE Advanced 2026 के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इस साल गुरुग्राम के 18 वर्षीय कबीर छिल्लर ने इतिहास रच दिया है। कबीर ने JEE Main में 300/300 अंकों के साथ AIR-1 प्राप्त की और JEE Advanced में 360 में से 329 अंक लाकर AIR-2 हासिल की।

न तनाव, न दबाव: बस कूल माइंडसेट ज्यादातर छात्र परीक्षा के नाम से ही घबरा जाते हैं, लेकिन कबीर की सफलता का राज उनका कूल माइंडसेट रहा। कबीर कहते हैं कि वे पेपर से पहले, दौरान और बाद में पूरी तरह रिलैक्स थे। उन्होंने कभी रैंक का बोझ सिर पर नहीं लिया, बल्कि उनका पूरा ध्यान विषयों को गहराई से समझने पर था।

क्वालिटी स्टडी पर दिया जोर आम धारणा है कि JEE क्रैक करने के लिए 14-15 घंटे पढ़ना जरूरी है, जिसे कबीर ने गलत साबित किया। कबीर रोजाना केवल 8 से 10 घंटे ही फोकस के साथ पढ़ाई करते थे। उनका मानना है कि घंटों से ज्यादा यह मायने रखता है कि आप पढ़ाई के दौरान कितने सचेत और एकाग्र हैं।

रटने के बजाय सेल्फ-एनालिसिस का फॉर्मूला कबीर ने रटने के बजाय कॉन्सेप्ट्स की स्पष्टता पर काम किया। फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के सिद्धांतों को व्यावहारिक जीवन से जोड़कर समझना उनकी ताकत बनी। हर मॉक टेस्ट के बाद कबीर अपनी गलतियों का बारीकी से विश्लेषण करते थे। वे खुद से पूछते थे कि गलती क्यों हुई और उस वक्त दिमाग में क्या चल रहा था? इस फीडबैक प्रक्रिया ने उनकी एक्यूरेसी को अचूक बना दिया।

छोटे टारगेट्स से जीता सिलेबस का समंदर जेईई का विशाल सिलेबस देखकर छात्र अक्सर रास्ता भटक जाते हैं। कबीर ने इसका हल सिलेबस को छोटे-छोटे डेली टारगेट्स में बांटकर निकाला। हर दिन सुबह अपना लक्ष्य तय करना और नोट्स का नियमित रिवीजन करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।

बचपन से ही मेधावी कबीर की प्रतिभा छोटी उम्र से ही दिखने लगी थी। 10वीं कक्षा में 98 प्रतिशत अंकों के साथ चमकने वाले कबीर को उनके शिक्षक बचपन से ही जीनियस मानते थे। उनके माता-पिता ने घर में हमेशा पढ़ाई के लिए सकारात्मक माहौल बनाए रखा, जहां उनका मंत्र था- अपना कर्म करो और परिणाम की चिंता छोड़ दो।

खेल और शौक से लिया स्ट्रेस ब्रेक कबीर किताबी कीड़ा बनने के बिल्कुल खिलाफ हैं। तनाव कम करने के लिए वे फुटबॉल खेलते थे और इंग्लिश प्रीमियर लीग (EPL) के मैच देखते थे। खेल और संगीत ने उनके दिमाग को हमेशा फ्रेश रखा, जिससे उनकी पढ़ने की क्षमता और एकाग्रता बनी रही।

अगला लक्ष्य: IIT बॉम्बे और MIT सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करने के बाद कबीर का लक्ष्य साफ है। वे IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस करना चाहते हैं और भविष्य में अमेरिका की प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से पढ़ाई करने का सपना देखते हैं। फिलहाल, वे इंटरनेशनल केमिस्ट्री ओलंपियाड की तैयारियों में व्यस्त हैं।

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