72 लाख का पैकेज ठुकराकर चर्चा में आया शख्स, वजह जानकर लोग बोले- बंदे में है दम
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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और वर्कहोलिक कल्चर के बीच एक ऐसी खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसने नेटिजन्स को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वाकई पैसा ही सब कुछ है? एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने अपने दोस्त मनीष की कहानी शेयर की है, जिसने 72 लाख रुपये सालाना का शानदार पैकेज सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि वहां काम की शर्तें उसे मंजूर नहीं थीं।

क्यों ठुकराया करोड़ों का ऑफर?

मनीष के सामने सबसे बड़ी समस्या कंपनी की सख्त नीतियां थीं। कंपनी ने सप्ताह में 5 दिन अनिवार्य रूप से ऑफिस आकर काम करने (Work From Office) को कहा था। इसके अलावा, कंपनी के पास कर्मचारियों के लिए कोई स्पष्ट लीव पॉलिसी नहीं थी। खास बात यह है कि नई जगह शिफ्ट होने के लिए कंपनी ने कोई रिलोकेशन बोनस देने से भी इनकार कर दिया था।

सैलरी हाइक में भी नहीं थी दम

इतनी बड़ी जिम्मेदारी के बदले में कंपनी ने मनीष को उनकी पुरानी सैलरी पर मात्र 25 फीसदी की बढ़ोतरी ऑफर की थी। मनीष का मानना था कि जिस शहर में कंपनी स्थित है, वहां के रहने-सहने के खर्च (Cost of Living) को देखते हुए यह हाइक बहुत मामूली है। उसने साफ कहा कि यह कॉन्ट्रैक्ट दोनों पक्षों के लिए बराबर नहीं, बल्कि सिर्फ कंपनी के फायदे के लिए झुका हुआ था।

गुलामी मंजूर नहीं, HR को दिया करारा जवाब

मनीष ने HR को भेजे अपने रिजेक्शन मैसेज में बेहद शालीनता से अपनी बात रखी। उसने लिखा, अगर मैं अपने करियर के शुरुआती दौर में होता, तो शायद इसे स्वीकार कर लेता। लेकिन जिंदगी के इस मोड़ पर, मैं ऐसे कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता जो पूरी तरह एकतरफा हो।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

यह पोस्ट सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई है। नेटिजन्स दो गुटों में बंट गए हैं। कुछ लोग मनीष की हिम्मत की दाद दे रहे हैं और कह रहे हैं कि मानसिक शांति और वर्क-लाइफ बैलेंस पैसों से बढ़कर है। वहीं, कुछ यूजर्स ने चेतावनी देते हुए कहा कि HR को सीधे तौर पर कॉन्ट्रैक्ट को शोषणकारी बताना भविष्य के लिए खतरा हो सकता है और उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।

क्या पैसा ही सब कुछ है?

पोस्ट शेयर करने वाली रागिनी पांडे ने बताया कि मनीष को इस फैसले पर रत्ती भर भी अफसोस नहीं है। यह घटना दर्शाती है कि अब प्रोफेशनल्स केवल मोटी सैलरी के पीछे नहीं भाग रहे, बल्कि वे काम की संस्कृति, सम्मान और अपनी प्राथमिकताओं को भी तवज्जो दे रहे हैं। फिलहाल, यह मामला कॉर्पोरेट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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