लिपुलेख विवाद: भारत के खिलाफ ब्रिटेन से गुहार लगा फंसे नेपाली पीएम बालेन शाह?
News Image

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह का एक बयान इस समय काठमांडू से लेकर नई दिल्ली तक चर्चा का विषय बना हुआ है। संसद में कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख विवाद पर चर्चा के दौरान उन्होंने न केवल भारत पर सीमा अतिक्रमण का आरोप लगाया, बल्कि यह कहकर सनसनी फैला दी कि नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण कर रखा है। उनके इस बयान से न केवल उनकी सरकार बैकफुट पर आ गई है, बल्कि नेपाल के भीतर भी विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।

ब्रिटेन से मांगी मदद, भारत को दरकिनार की कोशिश विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के उद्देश्य से बालेन शाह ने अब ब्रिटेन (UK) से हस्तक्षेप की मांग की है। सरकार का तर्क है कि कालापानी का विवाद 1816 की सुगौली संधि से जुड़ा है, जो ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। बालेन शाह के मुख्य सलाहकार कुमार ब्यंजनकर ने ब्रिटिश राजदूत रॉब फेन के साथ मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की है। नेपाल यह उम्मीद कर रहा है कि ब्रिटेन के पास मौजूद ऐतिहासिक नक्शे इस विवाद को सुलझाने में मददगार साबित होंगे।

क्या ब्रिटेन करेगा हस्तक्षेप? नेपाली अधिकारियों की इस कवायद का ब्रिटेन ने ठंडा स्वागत किया है। कूटनीतिक गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, ब्रिटिश राजदूत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यह भारत और नेपाल का द्विपक्षीय मामला है और ब्रिटेन इसमें कोई दखल नहीं देना चाहता। विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्रिटेन बखूबी जानता है कि भारत अपने सीमा विवादों में किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को कभी स्वीकार नहीं करता है।

राजनीतिक घेरे में पीएम शाह प्रधानमंत्री के इस बयान से नेपाल की राजनीति में हड़कंप मच गया है। विपक्षी दलों, पूर्व राजनयिकों और सीमा विशेषज्ञों ने शाह के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि नेपाल ने भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है । सीमा विशेषज्ञ बुद्धि नारायण श्रेष्ठ का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में किसानों द्वारा भूमि के उपयोग को अतिक्रमण बताना गलत है। इसे केवल क्रॉस-होल्डिंग ऑक्युपेशन कहा जा सकता है।

इस्तीफे की मांग, सरकार बचाव की मुद्रा में नेपाल के विदेश मंत्रालय को प्रधानमंत्री के बयान पर सफाई जारी करनी पड़ी है। वहीं, कम्युनिस्ट नेताओं समेत विपक्ष ने इसे देश की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ करार दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि कुछ नेताओं ने प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस्तीफे की मांग भी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बालेन शाह का यह कदम कूटनीतिक रूप से आत्मघाती हो सकता है, क्योंकि इससे भारत के साथ संबंधों में अनावश्यक तनाव पैदा हुआ है और नेपाल को कोई ठोस नतीजा भी नहीं मिला है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

कोहली-पाटीदार नहीं, ये खिलाड़ी है RCB का असली लकी चार्म , जिसके आते ही बदल गई टीम की किस्मत!

Story 1

लाडकी बहिन योजना: किस्त क्यों रुकी? मंत्री अदिति तटकरे ने बताई इन 4 गलतियों की सच्चाई

Story 1

दुआ लीपा की शादी: कौन हैं उनके पति कैलम टर्नर? जानें एक्टर की नेटवर्थ और दिलचस्प लव-स्टोरी

Story 1

RCB की खिताबी जीत: सड़कों पर मचा जश्न, कहीं आतिशबाजी तो कहीं पुलिस की लाठी

Story 1

3600 रुपये में छिना होनहार कबड्डी खिलाड़ी का जीवन: डेढ़ महीने तक नाले में सड़ता रहा शव

Story 1

द क्वीन की वापसी: 44 साल की उम्र में सेरेना विलियम्स का टेनिस कोर्ट पर धमाकेदार कमबैक

Story 1

कल का मौसम: 17 राज्यों में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट, इन इलाकों में 80 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

Story 1

वीआईपी कल्चर की भेंट चढ़ी आम जनता: गर्भवती पत्नी के लिए सड़क पर उतरा पति, रोका राज्यपाल का रास्ता

Story 1

हंसी के महादंगल के लिए हो जाइए तैयार, आ रही है धाकड़ एक्टर्स से सजी फिल्म उत्तर दा पुत्तर

Story 1

अलविदा mAadhaar: क्या पुरानी ऐप से नई आधार ऐप पर डेटा ट्रांसफर करना होगा? जानें पूरी सच्चाई