नई दिल्ली: भीषण गर्मी के बीच नौतपा का आगमन हो गया है। 25 मई से 2 जून 2026 तक चलने वाले इन 9 दिनों को लेकर ज्योतिष और विज्ञान दोनों के अपने-अपने तर्क हैं। लोग इसे सिर्फ गर्मी का प्रकोप नहीं, बल्कि प्रकृति के एक महत्वपूर्ण चक्र के रूप में देखते हैं।
भारतीय परंपरा में एक पुरानी कहावत है— जितना तपेगा नौतपा, उतनी अच्छी होगी वर्षा। विज्ञान भी इस बात की पुष्टि करता है। जब इन 9 दिनों में सूरज की तेज किरणें धरती पर पड़ती हैं, तो समुद्र और नदियों का पानी तेजी से वाष्पित होता है। यही जलवाष्प बादलों का निर्माण करती है, जो आगे चलकर मानसून की बारिश का आधार बनती है। यदि नौतपा में पर्याप्त गर्मी न हो, तो मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिसका सीधा असर खेती और भूजल स्तर पर पड़ता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब नौतपा शुरू होता है। सूर्य को ऊर्जा और जीवन शक्ति का कारक माना गया है, इसलिए इस दौरान सूर्य का प्रभाव अपने चरम पर होता है। शास्त्रों में इन 9 दिनों को तप का समय माना गया है, जिसमें सूर्य उपासना, दान-पुण्य और जल अर्पण का विशेष महत्व है। लोग इस दौरान प्याऊ लगवाना, सत्तू, आम, खरबूजा और मिट्टी के घड़ों का दान करना शुभ मानते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो मई के अंत में सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे लू की स्थिति बनती है। यह ऊष्मा वातावरण में कम दबाव (low pressure) का क्षेत्र बनाती है, जो समुद्री हवाओं को भारतीय भूभाग की ओर खींचने में मदद करता है। इसके अलावा, प्रचंड गर्मी हानिकारक बैक्टीरिया और कीटों को नष्ट कर वातावरण की प्राकृतिक सफाई में भी सहायक होती है।
आधुनिक तकनीक के अभाव में, पुराने समय के किसान नौतपा के तापमान से ही बारिश का पूर्वानुमान लगा लिया करते थे। यदि नौतपा के दौरान बादल छाए रहें या बारिश हो, तो इसे मानसून के कमजोर होने का संकेत माना जाता था। वहीं, भीषण गर्मी और लू को अच्छी वर्षा का शुभ संकेत माना जाता था।
आज के दौर में भले ही हम एयर कंडीशनर और कूलर की मदद से गर्मी से बच रहे हों, लेकिन नौतपा के चक्र को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह केवल एक गर्म दौर नहीं है, बल्कि धरती के जल, वायु और मौसम के संतुलन की एक अनिवार्य प्रक्रिया है। यह मानसून की नींव तैयार करता है, जिस पर पूरी कृषि व्यवस्था टिकी है।
अस्वीकरण: यह लेख केवल मान्यताओं और उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है। किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञों से सलाह लें।
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— ABP News (@ABPNews) May 20, 2026
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