CBSE के टेंडर में खेल : 17 साल के छात्र ने खोली सिस्टम की पोल, बड़े नेताओं ने की जांच की मांग
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सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) का नया ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम विवादों के घेरे में है। झारखंड के 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने बोर्ड की टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सार्थक का दावा है कि एक विशिष्ट कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के लिए नियमों में हेरफेर की गई।

क्या है छात्र का आरोप? सार्थक खुद इस साल 12वीं की परीक्षा में शामिल हुए थे। परिणाम के बाद कॉपियों के मूल्यांकन पर संदेह होने पर उन्होंने बोर्ड के टेंडर दस्तावेजों की गहन जांच की। सार्थक का आरोप है कि हैदराबाद स्थित Coempt Eduteck Pvt Ltd को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों को बदला गया।

बदले गए टेंडर के नियम सार्थक के अनुसार, फरवरी 2025 में जारी पहले टेंडर में TCS और Coempt Eduteck दोनों शामिल थे, लेकिन बाद में वह टेंडर सार्वजनिक रिकॉर्ड से हटा दिया गया। नए सिरे से जारी टेंडर में ब्लैकलिस्टिंग, टर्नओवर और तकनीकी प्रदर्शन से जुड़े नियमों में ढील दी गई, जिससे उक्त कंपनी को पात्रता हासिल करने में आसानी हो गई।

विवादित कंपनी का पुराना रिकॉर्ड छात्र ने खुलासा किया कि Coempt Eduteck पहले Globarena Technologies के नाम से जानी जाती थी। साल 2019 में तेलंगाना बोर्ड परीक्षा के दौरान हुए रिजल्ट घोटाले में भी इस कंपनी का नाम सामने आया था। इतनी विवादित पृष्ठभूमि वाली कंपनी को देश के सबसे प्रमुख बोर्ड का काम सौंपना संदेह पैदा करता है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल सार्थक की यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्षी नेता भी सक्रिय हो गए हैं। राहुल गांधी ने इसे गंभीर मामला बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। वहीं, अरविंद केजरीवाल ने भी छात्रों से इन दस्तावेजों को पढ़ने और समझने की अपील की है। नेताओं का कहना है कि भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

CBSE और कंपनी का पक्ष विवाद बढ़ता देख CBSE ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बोर्ड का तर्क है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और कंपनी ने सबसे कम बोली लगाकर टेंडर जीता है। वहीं, Coempt Eduteck के CEO का दावा है कि तेलंगाना विवाद में उन्हें कानूनी रूप से क्लीन चिट मिल चुकी है और बोर्ड के साथ उनका करार पूरी तरह वैध है।

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