नीट और सीबीएसई के बाद अब CUET पर ग्रहण: तकनीकी गड़बड़ी से फिर सवालों के घेरे में परीक्षा प्रणाली
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देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। NEET UG पेपर लीक और CBSE की मार्किंग पर मचे बवाल के बाद, अब CUET UG 2026 में हुई तकनीकी गड़बड़ी ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

क्या हुआ परीक्षा केंद्रों पर? 30 मई 2026 को आयोजित CUET UG परीक्षा के दौरान दिल्ली, नोएडा, अंबाला, वाराणसी, बेंगलुरु और कानपुर समेत कई शहरों के केंद्रों पर भारी अव्यवस्था देखने को मिली। तकनीकी खराबी के कारण परीक्षा तय समय पर शुरू नहीं हो सकी, जिससे हजारों छात्र केंद्रों के बाहर घंटों इंतजार करने को मजबूर हुए।

संस्थाओं की सफाई और कंपनसेटरी टाइम का आश्वासन परीक्षा संचालन का जिम्मा संभाल रही कंपनी (TCS) ने स्वीकार किया कि उनकी ओर से तकनीकी खामी हुई थी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मामले पर खेद जताते हुए कहा है कि तकनीकी समस्या को दूर कर लिया गया है और छात्रों को परीक्षा में पूरा एक्स्ट्रा टाइम (कंपनसेटरी टाइम) दिया जा रहा है ताकि किसी का नुकसान न हो। छात्रों के लिए हेल्पलाइन नंबर +91-11-40759000 भी जारी किए गए हैं।

राजनीतिक गलियारों में गरमाई बहस परीक्षा में देरी के मुद्दे पर राजनीतिक स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर इस अव्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि क्या देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं को संभालने के लिए हमारी एजेंसियां वास्तव में तैयार हैं? नोएडा के सेक्टर-64 समेत कई केंद्रों से छात्रों के हंगामे की खबरें भी सामने आई हैं।

क्या है असली समस्या: तकनीक या कुप्रबंधन? लगातार सामने आ रही इन गलतियों ने एक बड़ा बहस छेड़ दिया है—क्या हमारी परीक्षा प्रणाली तकनीक पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो गई है? या फिर बैकअप मैनेजमेंट और तैयारी में कोई बड़ी चूक है?

जब हर कुछ महीनों में किसी न किसी राष्ट्रीय परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा होता है, तो केवल छात्रों की मेहनत ही नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता दांव पर लग जाती है।

छात्रों के मानसिक तनाव का जिम्मेदार कौन? परीक्षा केंद्रों पर घंटों इंतजार करना और सिस्टम हैंग होने जैसी समस्याओं का सीधा असर छात्रों के प्रदर्शन और मानसिक शांति पर पड़ता है। प्रवेश परीक्षा का सपना संजोए लाखों युवाओं के लिए यह स्थिति बेहद तनावपूर्ण है। अब यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या देश की प्रमुख परीक्षाओं के लिए अब एक नए, अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद मॉडल की जरूरत है, ताकि भविष्य में छात्रों को इस तरह की अनिश्चितताओं का सामना न करना पड़े।

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