क्या इजरायल को मान्यता देगा पाकिस्तान? वॉशिंगटन में सवाल सुनते ही भाग खड़े हुए विदेश मंत्री इशाक डार
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वॉशिंगटन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की चुप्पी ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मचा दी है। एक पत्रकार के सीधे सवाल ने दोनों दिग्गजों को असहज कर दिया।

क्या है पूरा मामला? प्रेस इवेंट के दौरान एक रिपोर्टर ने इशाक डार से सीधा सवाल किया कि क्या पाकिस्तान भविष्य में इजरायल को आधिकारिक मान्यता देने पर विचार कर रहा है। सवाल सुनते ही इशाक डार और उनके साथ मौजूद मार्को रुबियो ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वे बिना जवाब दिए वहां से आगे बढ़ गए।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो यह घटना कैमरे में कैद हो गई और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस चुप्पी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या पाकिस्तान अपनी दशकों पुरानी नीति में बदलाव को लेकर दबाव में है, या फिर जानबूझकर इस संवेदनशील मुद्दे से किनारा कर रहा है।

अब्राहम समझौते का दबाव अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल ही में अरब और मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील कर चुके हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य इजरायल और मुस्लिम जगत के बीच कूटनीतिक संबंध स्थापित करना है। विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय राजनीति में हो रहे इन बदलावों के कारण पाकिस्तान पर भी अपना रुख स्पष्ट करने का दबाव बढ़ रहा है।

शांति दूत बनने की कोशिश में पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। इस्लामाबाद का दावा है कि वह कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की कोशिशों में जुटा है। हालांकि, इजरायल को मान्यता न देने की उसकी पुरानी नीति मध्यस्थ की उसकी भूमिका पर कई सवाल खड़े करती है।

फिलिस्तीन पर क्या है आधिकारिक रुख? घटना के बाद इशाक डार ने पाकिस्तान का बचाव करते हुए कहा कि उनका देश फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का समर्थन जारी रखेगा। पाकिस्तान का आधिकारिक स्टैंड दो-राष्ट्र समाधान (Two-state solution) का रहा है। साफ है कि पाकिस्तान के लिए स्वतंत्र फिलिस्तीन के बिना इजरायल को मान्यता देना फिलहाल एक बड़ी कूटनीतिक बाधा है।

क्या नीति में बदलाव की उम्मीद है? फिलहाल, इशाक डार के बर्ताव और सरकार के हालिया बयानों से यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान निकट भविष्य में अपनी पुरानी नीति को बदलने के मूड में नहीं है। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच पाकिस्तान इस मुद्दे पर सावधानी और खामोशी की रणनीति अपनाए हुए है।

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