जब इंडियन जेम्स बॉन्ड ने छुई दुनिया के पहले अंतरिक्ष यात्री की ब्लैक बीस्ट , रूस में पुरानी यादों में खोए अजीत डोभाल
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भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल इन दिनों रूस के दौरे पर हैं। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच पर आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के बाद, सुपर कॉप डोभाल मॉस्को के नेशनल स्पेस सेंटर पहुंचे। वहां उन्होंने दुनिया के पहले अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन की ऐतिहासिक कार ब्लैक बीस्ट (GAZ-21 Volga) को बेहद करीब से देखा।

जासूसों के जासूस का विंटेज प्रेम अजीत डोभाल खुद जासूसी की दुनिया के दिग्गज रहे हैं। जब वे गागरिन की इस आइकॉनिक कार के सामने पहुंचे, तो उनका उत्साह देखने लायक था। उन्होंने न केवल इस कार को करीब से निहारा, बल्कि उसे छूकर उस दौर को महसूस किया जब यह कार सोवियत संघ की शान हुआ करती थी। ऐसा लग रहा था मानो वे किसी अत्याधुनिक सुरक्षा वाहन को नहीं, बल्कि इतिहास के एक पन्ने को पढ़ रहे हों।

क्या है गागरिन की ब्लैक ब्यूटी की खासियत? 1950 के दशक में आई GAZ-21 वोल्गा उस दौर की रशियन रॉल्स रॉयस मानी जाती थी। यह कार एलीट क्लास के लिए खास तौर पर डिजाइन की गई थी, जिसमें 2.5 लीटर का दमदार पेट्रोल इंजन लगा था। अंतरिक्ष मिशन से सफल वापसी के बाद तत्कालीन सोवियत सरकार ने यह कार यूरी गागरिन को सम्मान स्वरूप भेंट की थी। आज भी इसके आइकॉनिक डिजाइन और मजबूती के चर्चे दुनिया भर के ऑटोमोबाइल प्रेमियों में मशहूर हैं।

पुतिन की किले जैसी कार बनाम गागरिन की विरासत जहाँ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ऑरस सेनात एक चलता-फिरता अभेद्य किला है, जो गोलियों और मिसाइलों को झेल सकती है, वहीं गागरिन की वोल्गा सादगी और क्लासिक इंजीनियरिंग का प्रतीक है। डोभाल ने जिस तरह इस कार को निहारा, उससे साफ था कि वे आधुनिक तकनीक और ऐतिहासिक विरासत के बीच के अंतर को बखूबी समझते हैं।

कौन थे यूरी गागरिन? 9 मार्च 1934 को एक साधारण परिवार में जन्मे यूरी गागरिन ने 12 अप्रैल 1961 को वोस्तोक-1 के जरिए अंतरिक्ष की यात्रा कर इतिहास रच दिया था। नाजी कब्जे के दौरान कष्ट झेलने से लेकर अंतरिक्ष तक का उनका सफर प्रेरणादायक है। महज 34 साल की उम्र में एक विमान हादसे में उनकी मौत हो गई थी, लेकिन उनकी यह ब्लैक बीस्ट कार आज भी उनके गौरवशाली अतीत की गवाह बनी हुई है।

अजीत डोभाल का यह दौरा राजनीतिक संदेशों के साथ-साथ उन ऐतिहासिक यादों के लिए भी याद रखा जाएगा, जो मॉस्को के स्पेस सेंटर की धूल भरी फाइलों से निकलकर आज भी जीवंत हैं।

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